उत्तराखंड से बड़ी ख़बर: यहा फैला मलेरिया , मां-बेटे की मौत, दो बच्चे अस्पताल में भर्ती

रुड़की: कलियर क्षेत्र में फैल रहा मलेरिया, मां-बेटे की मौत, दो बच्चे अस्पताल में भर्ती

 

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उत्तराखंड में बरसाती सीजन में वायरल, मलेरिया, डेंगू एवं स्क्रब टाइफस बुखार के मरीज सामने आने लगे हैं। बता दे इसमें भी मलेरिया जानलेवा साबित हो रहा है। अभी तक कलियर में तीन दिनों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। 

ओर मलेरिया से रुड़की क्षेत्र में एक ही परिवार में मां-बेटे की मौत हुई है, जबकि इसी परिवार के भाई-बहन अस्पताल में भर्ती हैं। कलियर क्षेत्र में रहने वाले इस परिवार के साथ-साथ आसपास के घरों में भी लोग बुखार से पीड़ित हैं। मृतक के परिजनों का कहना है कि न तो स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची है और न ही नालों की सफाई और दवा छिड़काव के इंतजाम किए जा रहे हैं। 
आठ दिन पहले रुड़की के आरोग्यम अस्पताल में कलियर निवासी तबस्सुम (40) पत्नी रियासत को भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां दो दिन पहले उसकी मौत हो गई।
इसी प्रकार बीते सोमवार को भी उनके बेटे आहत की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी बेटी 14 वर्षीय बेटी मंतसा का रुड़की के तुलसी अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉ. नवीन बंसल ने बताया कि मंतसा की मलेरिया रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। साथ ही प्लेटलेट्स घटने के बाद खून की कमी की शिकायत है। उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, जबकि मंतसा का नौ वर्षीय छोटा भाई अकदस को भी मलेरिया से पीड़ित होने पर एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मृतक तबस्सुम के भाई तनवीर ने बताया कि टेस्ट रिपोर्ट में साफ हुआ कि सभी को मलेरिया है। दो बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने से कलियर क्षेत्र में मलेरिया बुखार को लेकर भय का माहौल है। यही नहीं, परिजनों ने बताया कि उनके आसपास में कई लोग बुखार से पीड़ित हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर पंचायत की ओर से जांच और दवा आदि के छिड़काव की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है।  पीड़ित परिवार के लोगों ने बताया कि उनके मोहल्ले में जो लोग बुखार से पीड़ित हैं, उनका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है। साथ ही मरीज वायरल बुखार के अलावा उल्टी और शरीर में जकड़न जैसी शिकायत कर रहे हैं। ये लोग अपने स्तर पर ही अलग-अलग अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। 

 

डॉ. बताते है कि इलाज में देरी पर यह बुखार दिमाग पर असर करता है, जिसे सेरीब्रल मलेरिया कहा जाता है। ऐसा होने पर मरीज की चंद घंटों में ही मौत होने की आशंका पैदा हो जाती है। अगर मलेरिया का सही समय पर उपचार हो तो मरीज के ठीक होने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक होती है। 

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