
सीएम त्रिवेन्द्र रावत को विपक्ष तो चुनोती दे ही रहा है , ओर उनके राजनीतिक विरोधी भी आये दिन उनके पीछे हाथ धो कर पीछे पढ़े ही है अब ऐसे मे राज्य की जनंता की आवाज उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार अनिल चन्दोला जी ने अपनी फेसबूक् वाल पर जो पोस्ट की उसको पड़कर तो यही लग रहा है कि चन्दोला जी जनंता के दर्द को अपना समझ कर पूरी बात कही ओर शांति के साथ छाप दिए । आओ भी नज़र डाले जरा।
उत्तराखंड़ के पहाड़ी जिलो मे कितना गम है जब उनका गम देखा तो मै अपना गम भूल गया आज भी एक महिला दूंन अस्पताल मे जच्चा बच्चा के साथ मौत की नींद सो गई। हंगामा भी हुवा पर फर्क किसको पड़ता है? जब देहरादून जे अस्पताल मे ये हाल है तो पहाड़ के अस्पतालों में क्या हाल होगा। सोच कर ही अपना तो दिल कांप जाता है
फिर ये तो राज्य के वरिष्ठ पत्रकार अनिल चन्दोला जी है इनका वो दर्द फेसबुक वाल पर आखिर झलख ही गया
बहराल बोलता उतराखंड तो सिर्फ ये ही कहता है की अभी भी हालात को सुधारा जा सकता है इन हालातों के लिए राज्य की अब तक कि सभी सरकारे दोषी है जिन्होंने बोला बहुत कुछ पर हुवा क्या सब आपके सामने है। और अगर अब डबल इज़न की सरकार इन हालातों को नही सुधार पाई तो ये पहाड़ वासियो के लिए सबसे बड़ा दुर्भाग्य होगा ।






