
ये ख़बर त्रिवेन्द्र सरकार के लिए है ओर विपक्ष के साथ साथ आप ओर हम सब के लिए भी है आपको मालूम है कि ओवरस्पीड, ओवरलोड और सड़कों की खस्ताहाल हालत के साथ साथ लाहपरवाही की वजह से उत्तराखंड में अब तक 7477 हादसे हो चुके हैं। ओर हादसो का ग्राफ हर महीने 36 हादसों को लगातार पार कर रहा है आपको बता दे कि यह आंकड़ा राज्य बनने के बाद 17 साल का है। जिसमे 843 बस दुर्घटना शामिल हैं।
बोलता है उत्तराखंड की जवाबदेही महकमों की आधी-अधूरी तैयारी की वजह से देवभूमि में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ओर ये विभाग फिर भी सबक लेने को तेयार नही अगर बात करे धूमाकोट हादसे की तो इस हादसे मे 48 लोगों की मौत के बाद भी सरकारी मशीनरी नही जागी ओर सिर्फ तबादले करके अपना पल्ला झाड़ लिया सरकार ने ! पर लगाम कसने को गंभीरता नहीं दिखाई दी । बीते रोज दुःखद भिकिसासैंण हादसा भी देखने को मिला। जनाब अगर कुछ आंकड़ों पर नज़र डालें तो हर माह चार बस एक्सीडेंट होते हैं। ओर इन हादसों में 2497 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच हजार लोग घायल हो चुके है
आपको बता दे कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा हादसें कार चालकों के साथ हुए है। जिसमे 17 साल में 2129 कार एक्सीडेंट, 1548 बाइक, 1139 ट्रक, 969 टैक्सी, 849 जीप वाहनों से दुर्घटना हुई है।
आपको बता दे कि नैनीताल मे जनवरी से मई के बीच जनपद में 45 लोग अलग-अलग सड़क हादसों में जन गवां चुके हैं। यह आंकड़ा दून के बराबर है। ऊधम सिंह नगर में 92 और हरिद्वार में 76 मौत हुई है। सड़क हादसों में मौतों को लेकर नैनीताल प्रदेश में तीसरे नंबर पर है।
आपको बता दे -14 मार्च को अल्मोड़ा से रामनगर जा रही बस टोटाम के पास खाई में गिरी, 13 की मौत।
एक जुलाई को धूमाकोट हादसे में 48 की मौत।
19 जुलाई को ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर बस गिरने से 14 की मौत।
दो मई को थल-मुनस्यारी मार्ग पर बस खाई में गिरने से दो आइटीबीपी के जवानों की मौत।
जुलाई 2017 में अल्मोड़ा रोड पर लोहाली के पास बस हादसे में पांच महिलाओं की मौत।
फरवरी में चंपावत जिले के स्वाला में मैक्स वाहन खई में गिरने से दस की मौत।
ओर उसे बड़ी बात सुनिए गुरुवार को जो बस खाई में गिरी सो बस दस साल पुरानी है और वाहन के सभी कागज आरटीओ ऑफिस से पूरे हैं। आरटीओ राजीव मेहरा ने बताया कि पहाड़ में 15 साल पुरानी बस चलाने का नियम है। बशर्ते उसकी हालत ठीक हो।
बहराल त्रिवेन्द्र रावत की सरकार के लिए आये दिन बढ़ते सड़क हादसे इस सरकार को सोचने की जगह एक्शन लेने पर मजबूर कर रहे होंगे जो बहुत पहले ले लिए जाने चाइए थे इस तरह आये दिन जिस प्रकार हादसे हो रहे है उनके लिए अगर चालको की लाहपरवाही को ही सिर्फ जिम्मेदार ठहराया जाए तो ये गलत है ।कही सड़कों के हाल बुरे से बुरे है।कही गाड़ियों की फिटनेस पर सवाल उठते है। कही आल्वेदर रोड के निर्माण की वजह से जगह जगह मलबा पड़ा होना हादसे की वजह बन रहा है।कही सड़को पर बड़े बड़े गड्ढे हो रखे है। परिवहन विभाग पूरा लापरवाह है। लोकनिर्माण विभाग किसी से डरता नही । ओर r.t.o मौज ले रहे है। ओवर लोडिंग पूरी है रोक टोक सिर्फ कुछ दिनों की फिर ये बात आम है । सड़को के किनारे सुरक्षा का कोई शाधन नही । जनंता को जगरूक करने या समझ ले चालक को जाकरुक करने के लिए सड़कों के किनारे पर कुछ खास बात नही , डेंजर जोन का जिक्र तक नही, हा कुछ जगह को छोड़कर हाल फिर वही जैसे आप लापता गंज मे हो । अब सरकार को सोचना नही एक्शन लेने होगा जिससे परिणाम निकलकर आये ।






