
सुशासन के सूत्रधार खण्डूड़ी, विरासत के संवाहक बने मुख्यमंत्री धामी
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खण्डूड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस भाव से उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया, उससे यह स्पष्ट होता है कि खण्डूड़ी की कार्यशैली और उनके आदर्श आज भी उत्तराखंड की राजनीति और शासन व्यवस्था को दिशा दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस प्रकार मेजर जनरल खण्डूड़ी ने अपने कार्यकाल में ईमानदारी, पारदर्शिता, अनुशासन और कठोर निर्णयों के लिए पहचान बनाई थी, उसी प्रकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी राज्यहित में साहसिक फैसले लेने वाले नेता के रूप में उभरे हैं। खण्डूड़ी ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शिथिलता के विरुद्ध जिस दृढ़ता का परिचय दिया था, उसी परंपरा को धामी सरकार आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य में नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिससे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसने इस दिशा में ऐतिहासिक पहल की। इसके साथ ही भू-कानून को लेकर सरकार ने प्रदेशवासियों की भावनाओं के अनुरूप कदम उठाए हैं तथा अवैध अतिक्रमण, अवैध मदरसों और अवैध निर्माणों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है।
जनरल खण्डूड़ी की तरह मुख्यमंत्री धामी भी निर्णय लेने की क्षमता, प्रशासनिक दृढ़ता और स्पष्ट नेतृत्व के लिए चर्चा में हैं। यही कारण है कि आज प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी बढ़ती लोकप्रियता दिखाई दे रही है। समर्थकों का मानना है कि धामी सरकार उत्तराखंड को विकास, सुशासन और पारदर्शिता के उस मार्ग पर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जिसकी मजबूत नींव मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूड़ी ने रखी थी।
उत्तराखंड की राजनीति में खण्डूड़ी को सुशासन और ईमानदार नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करना केवल एक औपचारिक सम्मान नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और विकास दृष्टि को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक माना जा रहा है।





