
आपको हम ये बता दे कि ठीक ठीक 17 साल पहले संसद पर हमला हुवा था और उस हमले को नाकाम करने में उत्त्तराखंड के मातवर नेगी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
पर दुःख इस बात का है कि
मातबर सिंह नेगी की जन्मस्थली सासौं गांव को राज्य की अब तक कि सभी सरकार भूल गई।
आपको बता दे कि शहीद मातबर नेगी को उनकी वीरता के लिए केंद्र सरकार ने अशोक चक्र से सम्मानित भी किया, लेकिन उत्त्तराखंड की राज्य सरकार घोषणा करके ही भूल गई। ख़बर है कि शहीद के बेेटे गौतम ने मीडिया से कहा है कि आज 17 सालो बाद भी शासन-प्रशासन का कोई प्रतिनिधि ना तो उनके पिता को श्रद्धांजलि देने गांव पहुंचा। ओर ना किये गए वादे को पूरा किया गया ये कहते ही वो बहुत भावुक भी हो गए ।
आपको तो मालूम है ही कि आज संसद हमले की बरसी है। ठीक 13 दिसंबर 2001 को जब देश की संसद पर आतंकवादियों ने जब हमला किया था, तब गेट नंबर 2 पर तैनात उत्त्तराखंड के लाल विकासखंड एकेश्वर की मवालस्यूं पट्टी के सासौं निवासी मातबर सिंह नेगी भाई ने मुस्तैदी दिखाते हुए गेट को बंद कर दिया था। ओर इस गेट से कुछ देर बाद ही तत्कालीन उपराष्ट्रपति कृष्णकांत आने वाले थे।
वही गेट बंद करते समय आतंकवादियों की एक गोली मातबर नेगी भाई को लग गई और इलाज़ के दोरान अस्पताल में मातबर ने अंतिम सांस ली।
मातबर के शहीद होने पर राज्य के नेताओं ने स्मारक बनाने से लेकर शहीद के गांव का विकास करने और क्षेत्र में शहीद के नाम पर आईटीआई व महाविद्यालय खोलने सहित कई घोषणाएं की थी, लेकिन दुःख इस बात का है कि 17 साल गुजरने के बाद भी सरकारों की एक भी घोषणा पूरी नहीं हुई।
आपको बता दे कि आज भी शहीद की जन्मभूमि काणी मवालस्यूं (उपेक्षित) के नाम से जानी जाती है। शहीद के बेटे गौतम नेगी बताते हैं कि आज तक शासन-प्रशासन का कोई भी प्रतिनिधि उनके पिता को श्रद्धांजलि देने गांव नहीं पहुंचा।
वही सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र रावत व मनोज बिष्ट बताते हैं कि राज्य सरकार यदि शहीद की शहादत की सुध लेती, तो क्षेत्र में आईटीआई या महाविद्यालय ही शहीद के नाम पर खोल देती। जिस स्कूल से मातबर पढ़े, वह स्कूल भी बुरी हालत में है।
बहराल जब जब देवभूमि का लाल शहीद होता है तो उनकी अंतिम यात्रा में राजनेताओ ज़के लेकर सरकारें शामिल होकर शहीद के परिवार की हर सम्भव मदद ओर कुछ वादे करती है ।पर दुख उस बात का है कि उन वादों को पूरा नहीं किया जाता।

अब देखना ये होगा को जो काम पिछले 17 साल मे नही हुवा उसे क्या सीएम त्रिवेन्द्र रावत पूरा करेंगे । उम्मीद तो है कि ये सरकार शहीद के परिवार को निराश नही करेगी।





