
उत्तराखंड़ राज्य की राजधानी देहरादून मे समय समय पर पालिथिन पर रोक लगाने के लिए ओर लोगो को जागरूक करने के काम किया इसी के चलते बीजेपी के नेता जोगेन्द्र पुंडीर ओर गिरिश सनवाल “पहाड़ी, ने लगभग 14 साल पहले ही इस खतरनाक पालीथिन का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार कर दिया था
और इसके इस्तेमाल पर समय समय पर रोक लगाने की मांग उठाई थी ओर तब से लेकर आज तक जब भी इनको मौका मिला या फिर विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बीजेपी नेता जोगेन्द्र पुंडीर अब तक एक लाख से जायदा की संख्या में कपडे के थैले खुद बनवाकर लोगो के देते आ रहे है और उनको जागरूक भी कर रहे है ओर सबसे बड़ी बात की इन लोगो ने 14 साल से आजतक पालीथिन का इस्तेमाल नहीं किया
अब जब 1 अगस्त से राज्य मे पालीथिन को ना है तो बीजेपी नेता जोगेन्द्र पुंडीर ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत को बहुत बहुत धन्यवाद कहा उन्हीने कहा कि देव भूमि उत्तराखण्ड को पोलोथीन से मुक्त करने का यह बहुत ही सुन्दर कदम उठाया गया है ओर अब नौजवान , नौनिहालो ओर आने वाले कल के लिये अच्छा, स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण हम सब मिलकर देगे जैसा की हमारे बडे बुजुर्गों ओर पूर्वजों ने हमको दिया था तभी हम सब मिलकर प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के सपने को साकार कर पायेंगे
अब बोलता है उत्तराखंड़ अगर आपने कल यानि एक अगस्त से पॉलीथिन के इस्तेमाल किया तो नतीजा भुगतने को तैयार रहना क्योकि त्रिवेन्द्र सरकार ने एक अगस्त से पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। 
हाई कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बावजूद पॉलिथीन के इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी था प्रशासनिक अधिकारीयो ने कही बार छापे भी मारे ओर जुर्माना भी लिया पर असर कम हुवा ऐसे में अब प्रदेश सरकार इसे ओर सख्ती से लागू कराने जा रही है। सीएम त्रिवेंद्र रावत ने ट्विट कर ये जानकारी साझा की है। 
ट्वीट के ज़रिए सीएम ने ये साफ किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में एक कदम बढ़ाते हुए उत्तराखंड को पॉलिथीन मुक्त करने का संकल्प लिया है। एक अगस्त से पूरे राज्य में पॉलिथीन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। 
साथ ही सरकार ने इसके इस्तेमाल पर भारी भरकम जुर्माना लगाने का फैसला लिया है। सीएम ने पॉलिथीन का इस्तेमाल करने वाले पर लगने वाले जुर्माने की जानकारी भी साझा की है। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि इसका इस्तेमाल करने पर दुकानदारों पर ₹5000, ठेली वालों पर ₹2000 व ग्राहकों पर ₹500 तक का जुर्माना लगेगा। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद कर दें और इस मुहिम में अपना सहयोग दें। आपको बता दे कि अगर प्लास्टिक थैलियों का निपटान यदि सही ढंग से नहीं किया जाता है तो वे जल निकास (नाली) प्रणाली में अपना स्थान बना लेती हैं, जिसके फलस्वरूप नालियों में अवरोध पैदा होकर पर्यावरण को अस्वास्थ्यकर बना देती हैं। इससे जलवाही बीमारियों भी पैदा होती हैं। रि-साइकिल किये गए अथवा रंगीन प्लास्टिक थैलों में कतिपय ऐसे रसायन होते हैं जो निथर कर जमीन में पहुंच जाते हैं और इससे मिट्टी और भूगर्भीय जल विषाक्त बन सकता है। जिन उद्योगों में पर्यावरण की दृष्टि से बेहतर तकनीक वाली रि-साइकिलिंग इकाइयां नहीं लगी होतीं, वे प्रक्रम के दौरान पैदा होने वाले विषैले धुएं से पर्यावरण के लिये समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्लास्टिक की कुछ थैलियों जिनमें बचा हुआ खना पड़ा होता है, अथवा जो अन्य प्रकार के कचरे में जाकर गड-मड हो जाती हैं, उन्हें प्राय: पशु अपना आहार बना लेते हैं, जिसके नतीजे नुकसान दायक हो सकते हैं। क्योंकि प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ है जो सहज रूप से मिट्टी में घुल-मिल नहीं सकता और स्वभाव से अप्रभावनीय होता है, उसे यदि मिट्टी में छोड़ दिया जाए तो भूगर्भीय जल की रिचार्जिंग को रोक सकता है। इसके अलावा, प्लास्टिक उत्पादों के गुणों के सुधार के लिये और उनको मिट्टी से घुलनशील बनाने के इरादे से जो रासायनिक पदार्थ और रंग आदि उनमें आमतौर पर मिलाए जाते हैं, वे प्राय: स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते हैं। तो आइए हम सब मिलकर त्रिवेन्द्र सरकार के साथ चले और पूरे राज्य को पॉलीथिन से मुक्त करे क्योकि आपके लिए हम सब के लिए ओर आने वाले कल के लिए जरूरी है कि अब पॉलीथिन को राज्य मे ना घुसने दिया जाए लेकिन बोलता है उत्तराखंड़ की ईमानदारी से इस कि मॉनिटरिंग करना कि पॉलीथिन का उपयोग कहा हो रहा है और कहा नही ओर कहा से ये पालिथिन आगे अगर आयी तो सरकार उस पर कठोर से कठोर कार्यवाही करें ओर अब आप इनका इस्तमाल क़रे 




