बड़ा खुलासा :- इन अधिकारियों लगाया उत्तराखंड रोडवेज को लाखों का चूना
इस तरह दिया घोटाले को अंजाम, 6 अधिकारियों के खिलाफ बैठी जांच
हल्द्वानी। उत्तराखंड रोडवेज में लाखों के घपले-घोटाले का मामला सामने आने से विभाग में हडंकंप मच गया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जेएनएनयूआरएम काठगोदाम डिपो के चालक-परिचालकों को अधिक भुगतान करने का मामला सामने आया है। अधिकारियों ने चालक-परिचालकों को नियम विरुद्ध अधिक भुगतान कर दिया। रोडवेज मुख्यालय को इस बात का पता चला तो हडंकंप मच गया। मुख्यालय के निर्देश में जांच शुरू हो गई है, इसमें प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की पुष्टि भी हुई है। अभी जांच चल रही है, सूत्रों की माने तो इसमें और बड़ा खुलासा हो सकता है। एजीएम वित्त सुरेंद्र सिंह बिष्ट को जांच अधिकारी बनाया गया है। जांच के प्रथम चरण में 72 हजार रुपये का मामला पकड़ में आया है। छह अधिकारियों की इस मामले में जांच चल रही है। इस पूरे मामले पर जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि जेएनएनयूआरएम काठगोदाम से जुड़े छह अधिकारियों को एक फरवरी 2019 को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ये जांच अधिक भुगतान को लेकर की जा रही है। जांच जनवरी से जून 2018 पीरियड की जा रही है। शुरूआती चरण में 72 हजार रुपये आर्थिक हानि पकड़ में आई है। जांच अभी जारी है।
गौरतलब है कि जेएनएनयूआरएम की बसें निर्धारित परिधि (75 किमी के दायरे) में चलती हैं। इनका रूट भी तय है। परिवहन निगम जेएनएनयूआरएम की बसों के चालक-परिचालकों को प्रति किमी 2.22 रुपये, 1.89 रुपये के हिसाब से एक निश्चित राशि का भुगतान करता है। जेएनएनयूआरएम काठगोदाम के अधिकारियों ने अपने डिपो की आय बढ़ाने के लिए इन बसों को निर्धारित रूट की जगह हरिद्वार, देहरादून जैसे लंबे रूटों में भेजा। इसके एवज में चालक-परिचालकों को प्रति किमी 2.18 रुपये, 1.86 रुपये के हिसाब से पेमेंट किया जाना था। लेकिन अधिकारियों ने चालक-परिचालकों को प्रति किमी 2.22 रुपय, 1.89 रुपये के हिसाब से ही भुगतान कर दिया। इसमें नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई। इससे निगम को लाखों रुपये की आर्थिक हानि हुई। मामला पकड़ पर आने पर मुख्यालय ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।