विधानसभा चुनाव 2022 में टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं को मनाने में भाजपा-कांग्रेस के पसीने छूट गए हैं। सोमवार को नाम वापसी के अंतिम दिन को देखते हुए दोनों दलों ने बागियों को मनाने के लिए अपनी टीमें उतार दीं। यदि यह प्रयास सफल नहीं हुए तो दोनों दल, बागियों को पार्टी से बाहर कर देंगे। भाजपा में राज्य की 16 विधानसभा सीटों पर 22 व कांग्रेस से 13 बागियों ने नामांकन कराया है। रविवार को दोनों दल, बागियों की मान-मनौव्वल में जुटे रहे। हालांकि, सूत्रों के अनुसार इसमें बहुत अधिक सफलता नहीं मिल पाई।

भाजपा ने सांसदों को उतारा : भाजपा ने अपने पार्टी सांसदों को उनके संसदीय क्षेत्रों में बागियों को मनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। रविवार को कपकोट में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, टिकट न मिलने से खफा पूर्व विधायक शेर सिंह गड़िया को मनाने में कामयाब रहे। पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत कालाढुंगी से नामाकंन करा चुके पूर्व प्रदेश महामंत्री गजराज बिष्ट को मनाने के लिए हल्द्वानी पहुंचे। त्रिवेंद्र ने गजराज को मना लिया। गजराज बिष्ट ने कहा कि वह सोमवार को अपना नामांकन वापस ले लेंगे।

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पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक को हरिद्वार व सांसद तीरथ रावत पर गढ़वाल संसदीय सीट के तहत आने वाली विधानसभा क्षेत्रों के बागियों को मनाने का जिम्मा है। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी कोटद्वार तथा डोईवाला सीट के बागियों के संपर्क में हैं। बलूनी ने सौरभ थपलियाल और सुभाष भट्ट से बातचीत की और उन्हें लगभग मना लिया है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि कुछ अन्य बागियों ने भी नामांकन वापस लेने का भरोसा दे दिया है। सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार टिहरी संसदीय क्षेत्र के बागियों के संपर्क में हैं।

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पार्टी बागियों को मनाने की पूरी कोशिश कर रही है। इसके बाद भी अगर कोई कार्यकर्ता, पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में डटा रहता है तो भाजपा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कारवाई करने से नहीं हिचकेगी।
प्रह्लाद जोशी, चुनाव प्रभारी, भाजपा

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