हमारे व्हॉट्सपप् ग्रुप से जुड़िये

देहरादून– उत्तराखंड में शिक्षा विभाग सबसे बड़ा महकमा है ऐसे में शिक्षकों के नाराज होने का मतलब है सरकार के लिए परेशानी ऐसे में शिक्षा विभाग ने एक और ऐसा फैसला ले लिया है जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक नाराज हो गए हैं और अब वह खुले तौर पर अपनी नाराजगी जताने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।

आपको बता दें की शिक्षा विभाग द्वारा एलटी संवर्ग की वरिष्ठता सूची तैयार किए जाने से सीटी संवर्ग से एलटी में समायोजित हुए शिक्षक खुश नहीं हैं। मूल रूप से सीटी संवर्ग के शिक्षक लगातार इसका विरोध जता रहे हैं। विरोध के तौर पर 500 से ज्यादा शिक्षकों ने शिक्षा निदेशालय को मेल पर इस सूची पर आपत्ति जताई है। राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र भेज इसका विरोध जताया।राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अजय राजपूत ने कहा कि 1986 में राज्य सरकार ने सिटी संवर्ग को मृत मान एलटी संवर्ग में समायोजित कर दिया था। लेकिन समायोजित शिक्षकों को उनकी नियुक्ति की तिथि से आज तक वरिष्ठता नहीं दी गई।

तत्कालीन समय से ही शिक्षक नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता देने की मांग कर रहे हैं। इस संदर्भ में उच्च न्यायालय भी राज्य सरकार को सीटी संवर्ग के शिक्षकों को नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता देने के निर्देश दे चुका है। लेकिन शिक्षा विभाग कोर्ट की अवमानना कर इस आदेश को लागू नहीं कर रहा।अब तक केवल उन्हीं शिक्षकों को वरिष्ठता दी गई जो कोर्ट की शरण में गए। सीटी से एलटी संवर्ग की वरिष्ठता दिए जाने संबंधी पत्रावली शासन में लंबित है, बावजूद इसके शिक्षा विभाग ने वरिष्ठता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में विभाग अपने चहेतों को लाभ देने के लिए यह सब कर रहा  है। अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगी तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here