
ख़बर टिहरी लोकसभा सीट से है जहा पूरा एक परिवार सिस्टम को कोस रहा है और कोसे भी क्यो ना उन्होंने अपनी घर की मातृशक्ति को जो खो दिया ।
आपको बता दे कि सड़क सुविधा के अभाव में थौलधार ब्लॉक की एक गर्भवती महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। ख़बर है कि गर्भवती महिला को चारपाई पर बैठाकर ग्रामीण उसे कंडीसौड़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ला रहे थे, लेकिन महिला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया। वही ग्रामीणों का कहना है यदि गांव तक सड़क होती, तो गर्भवती महिला की जान बच सकती थी।पर राज्य गठन के 18 साल बाद भी सड़क नही पहुची जो दुःखद है। वही टिहरी की जिलाधिकारी ने कहा है कि घटना की जांच कराई जाएगी। ओर सूचना छुपाने पर आशा के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दे कि थौलधार ब्लॉक के सुनारगांव डंगोलिया तोक के भंडारी बस्ती निवासी अनिल भंडारी की पत्नी पार्वती महज उम्र 22 साल को 28 फरवरी को प्रसव पीड़ा हुई। फिर सड़क नहीं होने पर परिजन और ग्रामीण पार्वती को चारपाई पर बैठाकर कंडीसौड़ अस्पताल ले जा रहे थे। लगभग दो किमी की पैदल दूरी तय कर ग्रामीण जैसे ही शाम करीब सात बजे सुनार गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे पहुंचे, तो उसी समय गर्भवती महिला ने दम तोड़ दिया। मगर परिवार फिर भी महिला के जीवित होने की आस में सुनारगांव में ग्रामीणों ने उसे कार से अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक डॉक्टरों ने गर्भवती और उसके कोख में पल रहे बच्चे को मृत घोषित कर दिया। आपको बता दे कि पार्वती का यह पहला बच्चा था। परिजनों ने बताया कि पार्वती रूटीन स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कंडीसौड़ अस्पताल जाती थी। डॉक्टरों ने उसे सामान्य प्रसव होने की जानकारी भी दी थी।
वही प्रधान निहाल सिंह पुरुसोड़ा, कृपाल सिंह भंडारी, वीर सिंह, ज्ञान सिंह भंडारी, खेम सिंह का कहना है यदि गांव तक सड़क होती तो उसकी जान बच सकती थी। सड़क होने पर 108 सेवा गांव तक पहुंच सकती थी। इस भंडारी बस्ती में लगभग 35 परिवार रहते है।
वही चिकित्साधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कंडीसौड़ डा. धर्मेंद्र उनियाल ने कहा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही गर्भवती महिला और बच्चे की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने पोस्टमार्टम न करने का लिखित प्रार्थना पत्र दिया। यदि पोस्टमार्टम हो जाता तो मौत के कारणों का सही पता चलता। ख़बर है कि जिलाधिकारी टिहरी सोनिका ने मीडिया से कहा कि घटना की जानकारी ली गई। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। जांच कराई जाएगी, लेकिन सबसे पहले कार्रवाई आशा कार्यकर्ता के खिलाफ होगी। उन्होंने सूचना क्यों छुपाई। सड़क सुविधा से जिले के कई गांव वंचित है। यदि कभी किसी गांव में इस तरह की समस्या आती है, तो ग्रामीणों को प्रशासन को समय रहते सूचित करना चाहिए। बहराल एक माँ की जान चली गई ओर ये कोई पहला वाक्य नही है पहाड़ मे आये दिन इस प्रकार की दुःखद घटनाये सामने आती रहती है
लोकसभा चुनाव नजदीक है। टिहरी से भाजपा की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह है लिहाजा उनसे टिहरी की जनता ये सवाल जरूर पूछेगी की बताओ सांसद जी आपने अपनी सांसद नीधि से स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गाँव गाँव सड़क पहुचाने के लिए क्या किया।





