
राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने चयन के नाम पर पहली बार अच्छा और सटीक फेसला लिया है या फिर दिल्ली हाईकामान ने ही इन नामो को ओके करने को कहा होगा क्योकि उत्तराखंड़ मे सूचना आयुक्त की खाली कुर्सी को काफी समय हो गया था और आरोप लग रहे थे कि मुख्यमंत्री आखिर क्यों सूचना आयुक्त की कुर्सी पर किसी पर क्यो किसी को नही बैठा रहे है काफी समय से बैठकों का दौर जारी रहा पर नतीजा कुछ नही निकलता था जिसका कारण था कि कुछ लोग अपने लोगो को यहा बैठाना चाहते थे और हर बार ये बैठक बिना किसी परिणाम के खत्म हो जाती थी जब जब जो नाम निकलकर आये उन नामो का विरोध सोशल मीडिया मे देखा जाने लगा तो दूसरी तरफ कही अनुभवी पत्रकार भी इस दौड़ मे शामिल थे और उनके पीछे रहने की वजह यही मानी जा रही है कि किस को बनाया जाता और किस को नही क्योकि हर अनुभवी पत्रकारो की सिफारिश कही विधायक से लेकर मंत्री और ताकतवर नोकरशाह लगातार लगा रहे थे इन हालातों मे वो नाम निकलकर आये जिसकी कोई चर्चा ही नही चली और अचानक इन नामो पर मुहर लग गई जिस पर सभी ने अपनी सहमती दे दी पूर्व नोकर शाह विनोद शर्मा ने तो पूरे घोड़े देहरादून से लेकर दिल्ली तक के खोल दिये थे पर हासिल कुछ ना हो सका, क्योंकि शनिवार को सूचना आयुक्तों के चयन के सम्बंध में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत की अध्यक्षता में गठित चयन समिति की बैठक आयोजित हुई। ओर अबकी बार इस बैठक में सर्वसम्मति से चयन समिति द्वारा श्री चन्द्र सिंह नपल्च्याल, सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी तथा श्री जे.पी.ममगाई, सेवानिवृत्त आई.आर.एस. अधिकारी को सूचना आयुक्त के लिए चयनित किया गया।
इस चयन समिति की बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, नेता प्रतिपक्ष डॉ. इन्दिरा ह्दयेश, अपर मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी उपस्थित थी।
आपको बता दे सोशल मीडिया मे जहा इस बात का जिक्र लगातार हो रहा है कि सरकार फिर से बाहरी व्यक्तियों और पूर्व नोकरशाह को लेकर आई है तो वही दूसरी तरफ राज्य की समझ और दूर सोच रखने वाले जानकार बोल रहे है कि त्रिवेन्द्र रावत ने पहली बार सही नामो का चयन किया है । आपको बता दे इसमे सबसे ज्यादा चर्चा सोशल मीडिया मे जे पी ममगाई की हो रही है।आपको बता दे कि सरकार द्वारा जे पी ममगाई जो कि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी रहे हैं उनको राज्य सूचना आयुक्त कि जिम्मेदारी दी गई है। जिसके बाद ये कहा जा रहा है कि अब त्रिवेंद्र ने ठीक निर्णय लिया है आपको बता दे कि इस फैसले को ठीक किन कारणों से बोला जा रहा है 
जेपी ममगाईं उत्तराखंड मूल के हैं और उत्तराखंड के सभी विषयों पर गहरी पकड़ रखते हैं
वह अटल जी की स्वर्णिम चतुर्भुज योजना जिसके मंत्री जनरल बीसी खंडूरी थे, उनके साथ इस महा योजना की रेख देख में बड़ा योगदान दे चुके हैं।
वह पूर्व मुख्यमंत्री जनरल खंडूरी के विशेष कार्याधिकारी रहे हैं, उन्हें बहुत सुलझा हुआ और व्यवहार कुशल अफसर माना जाता है ।
उत्तराखंड की प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए वह दिल्ली में उत्तराखंड सरकार के निवेश और विनिवेश आयुक्त भी रहे।
उत्तराखंड में दुर्गम क्षेत्रों तक भ्रमण करके उनके परिचय का दायरा और उत्तराखंड के विषयों की समझ गहरी है जिसका लाभ उत्तराखंड के उन फरियादियों को मिलेगा जो छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर शासन में एरिया रगड़ते हैं।
सामान्य सी पृष्ठभूमि के ममगाईं की शिक्षा दीक्षा विदेश में भी हुई है वह नॉर्वे से सेल्यूलोस टेक्नोलॉजी में पीजी डिप्लोमा है, जो कि विश्व की एक प्रतिष्ठित टेक्निकल यूनिवर्सिटी है। और आईआईटी रुड़की से जो कि तत्कालीन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी सहारनपुर के नाम से जाना जाता था में पल्प एंड पेपर टेक्नोलॉजी में विशिष्ट विशेषज्ञता हासिल की है
हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा आईआरएस से अवकाश प्राप्त होने के बाद ममगाईं पूरे देश में जीएसटी, सीमा शुल्क और सूचना के अधिकार विषय के मामले में कंसल्टेंसी दे रहे हैं।
पौड़ी जनपद के मूल निवासी ममगाई का निरंतर पलायन और शिक्षा को लेकर अभियान जारी रहता है, ओर यही कारण है कि त्रिवेंद्र सरकार के इस फैसले को काफी सराहा जा रहा है साथ ही उम्मीद जगी है कि ये पहाड़ी आयुक्त पहाड़ के लोगो की फरियाद ओर उनके लंबित मामलों को जल्द से जल्द पूरा कर निर्णय तक लायेंगे ओर भले ही सरकार ने एक अच्छे नाम का चयन किया है पर जे पी ममगाई को भी अब ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य को निभाना होगा फिर चाहे सरकार के विरोध जरुरत पढ़ने पर मोर्चा ही क्यो ना खोलना पढ़े । फिलहाल जे पी ममगाई जी को बोलता उत्तराखंड़ की तरफ से बहुत बहुत सुभकामनाये इस उम्मीद के साथ कि ईमानदारी से करना काम और पहाडियो की उम्मीदों ओर विस्वास का कत्ल ना करना आप । 





