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‘ऊॅ शान्ति, ऊॅ शान्ति’’
पद्म विभूषण, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और एक पतली-दुबली सात्विक काया के स्वामी, छोटे से गाॅव में जन्मे श्री सुन्दरलाल बहुगुणा जी ने अपनी वैचारिक सोच से पूरी दुनिया और देश को प्रभावित किया। सरकारों को अपनी बात मनवाने के लिये उन्होंने उपवास के अस्त्र का, गाॅधी जी के तरीके से सदुपयोग किया। लोगों ने उनको पर्यावरणविद की संज्ञा दी लेकिन वो वास्तविक अर्थों में प्रकृति पुरूष थे, जो प्रकृति संवर्धन के लिये जिये और अपने विचारों से लोगों को प्रभावित करने का काम किया। सत्ता को उनको कभी लालच नहीं रहा, ऐसे महापुरूष को क्रूर कोरोना ने हमसे छीन लिया। मैं, उनको श्रद्धासुमन अर्पित करते हुये अपने राज्य व देश के उन ऐसे हजारों भाई-बहनों को जिनको असमय हमसे छीना है, जो हमारी व्यवस्थागत कमियों के कारण अपना उपचार नहीं करा सके या जिनका पूर्ण उपचार नहीं हो पाया, मैं ऐसी सारी दिवंगत आत्माओं को भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हॅू। भगवान, उनकी आत्माओं को शान्ति प्रदान करें और मैंने स्व. श्री सुन्दरलाल बहुगुणा जी के चित्र के सानिध्य में यह ‘‘मौन उपवास’’ इसलिये रखा, ताकि सत्ता में बैठे हुये लोगों तक हम इस भाव को पहुंचा सकें कि और शक्ति/ताकत लगा दो, दूसरे काम कल का इंतजार कर सकते हैं। मगर जीवन बचाने का काम कल पर नहीं छोड़ा जा सकता है। आज उत्तराखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में जिस तरीके से कोरोना की बड़ी प्रभावी/भयाभव दस्तक हो गई है, दूर दराज के गांव, सीमान्त क्षेत्र के गांव, जहां चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। लोग बिना चिकित्सा के, बिना किसी तरीके सहायता के मर जा रहे हैं तो उन लोगों को बचाने के लिये काम करें, उनके लिये पूरी ताकत लगा दें, राज्य के संसाधनों को लगा दें। यह अनुरोध करते हुये मैं, उन सब दिवंगत आत्माओं को याद करता हॅू जो कोरोना संक्रमण के शिकार हुये हैं और देश की महानतम् आत्मा श्री सुन्दरलाल बहुगुणा जी के श्रीचरणों/चित्र में ये पुष्प अर्पित कर उनकी स्मृति को भी प्रणाम करता हूॅ।




