
बोलता उत्तराखंड़ आज राज्य के दो बड़े नेताओं से सवाल कर रहा है ओर ये सवाल जवान भी कर रहा है। ओर ये दो बड़े नेता कोई और नही बल्कि लोकप्रिय आज की सरकार मे वन मंत्री हरक सिंह रावत है और दुसरे लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री जरनल खण्डूड़ी ओर वर्तमान सासंद पौड़ी लोकसभा । एक समय था जब दोनों अलग अलग पार्टी मे थे।और एक दुसरे के खिलाफ अक्सर आरोप लगाने के साथ साथ एक दूसरे के कामो का श्रेय लेने को कोशिस भी खूब करते थे। पिछले लोकसभा के चुनाव में तो जरनल खंडूड़ी के सामने लोकसभा चुनाव मे हरक सिंह रावत मैदान मे थे ( उस समय हरक सिंह कांग्रेस मे थे और रुद्रप्रयाग के विधायक हुवा करते थे) आज राज्य के अंदर कोई महीना या साल नही जाता जब हम ये नही सुनते की देवभूमि का लाल भारत माता की रक्षा करते ये जवान शहीद हो गया। अभी पिछले 90 दिनों के अंदर ही उत्तराखंड के 6 जवान भारत माता की रक्षा करते शहीद हो गए और ख़बर लिखे जाने तक देवभूमि के दो शहीद जवान हमीर सिंह और मनदीप सिंह की अंतिम यात्रा की तैयारी चल रही है ।और आज राज्य के यही शहीद पूछ रहे है इन नेताओं से की बताओ कहा है हमारे प्रदेश का दूसरा सैनिक स्कूल ? क्यो ये दूसरा स्कूल बनकर तैयार नही हुवा?
आपको बोलता उत्तराखंड़ विस्तार से ये ख़बर बता रहा है दरसल मे केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सैनिक बहुल्य प्रदेश के लिए साल 2013-14 में दूसरे सैनिक स्कूल की सौगात दी गई. जिसे जनपद रुद्रप्रयाग के विकाखण्ड जखोली के पट्टी बड़मा दिग्धार में चयनित किया गया। जब ये ख़बर गाँव वालों को मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना ना था सब ख़ुशी मैं झूम रहे थे उस दौरान तब . यहां पर ग्रामीणों द्वारा करीब 13 सौ नाली भूमि सैनिक स्कूल के लिए दान दी गई थी । कि चलो कुछ तो भला होगा हमारे पहाड़ के लाडलो का। क्योकि हमारे पाहड़ से ही कठिन मेहनत कर हमारे नोजवान सेना मे भर्ती होते है ,और समय आने पर अपना फर्ज निभा देते है । ओर सब वो सेना मे अफसर भी बड़ी मात्रा मे बनेंगे ।पर सरकारे अपना फर्ज नही पूरा करती ।
आपको बता दे कि रूद्रप्रयाग सैनिक स्कूल के लिए पूर्व सरकार द्वारा करोड़ों रुपये केवल भूमि समतलीकरण पर खर्च कर दिए गए । लेकिन तीन साल गुजर जाने के बाद भी एक इंच निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया। अब आप बताओ इसके लिए कोन दोषी है ओर कोन देगा जवाब ? एक समय था जब इस सैनिक स्कूल को रुद्रप्रयाग मे दिलाने के नाम पर जरनल खडूडी ओर हरक सिंह रावत दोनो के बीच मीडिया मे बहस छिड़ी होती थी ।हरक सिंह कहते थे कि ये स्कूल उनकी देन है, और पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी कहते थे की केन्द्र सरकार के सहयोग से सब हो रहा है और मे इसके प्रयास मे लगातार लगा रहता हूँ हरक सिंह रावत सिर्फ बयानी बाज़ी करते है काम नही । तो हरक सिंह रावत उस दौरान कांग्रेस की सरकार मे थे और राज्य के सैनिक कल्याण मंन्त्री हुवा करते थे वो कहते थे कि जरनल सिर्फ पत्र लिखने का काम करते है सैनिक स्कूल के लिए मे कही बार केन्द्र सरकार के अफसरों नेताओ के साथ बैठा हूँ।और यहा से भी लगतार हमारे अधिकारीयो ने लगातार प्रयास किया ये उसका नतीज़ा है सैनिक स्कूल। अब बोलता है उत्तराखंड , पूछता है उत्तराखंड़ , करता है पूरा रुद्रप्रयाग सवाल, जो शहीद हो रहे है हमारे सैनिक, पूर्व सैनिक कि बताओं हरक सिंह बोलो जरनल खंडूड़ी जी अब तक क्यो नही बनकर तैयार हुवा अपना ये सैनिक स्कूल ?क्या इसके लिए भी आप दोनों ही दोषी हो? क्योकि आज पहाड़ के ग्रामीण काश्तकार ओर गाँव वाले अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और ये ग्रामीण अब उग्र आन्दोलन की तैयारी में हैं मुख्य मंन्त्री त्रिवेन्द्र रावत जी ।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी पूर्ववर्त्ती कांग्रेस सरकार में तत्कालीन सैनिक कल्याण मंत्री व क्षेत्रीय विधायक डॉ हरक सिंह रावत रुद्रप्रयाग ( जो आज आपकी सरकार मे वन मंन्त्री है ) द्वारा अपनी लोकप्रियता बटोरने के लिए आनन-फानन में रुद्रप्रयाग के बड़मा दिग्धार में सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा तो कर दी गई थी लेकिन वो उस दौर में अपनी सरकार में सैनिक स्कूल के लिए कोई भी बजट का प्रावधान नहीं करवा पाये। जबकि केन्द्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के एक्ट 1880 के अनुसार किसी भी राज्य में स्वीकृत सैनिक स्कूल निर्माण का जिम्मा उस प्रदेश की सरकारों का होता है। भले ही उत्तराखण्ड देश का वह पहला राज्य बनने जा रहा है जिसे दो सैनिक स्कूलों की सौगात मिली हैं लेकिन पूर्ववती कांग्रेस एवं वर्तमान भाजपा सरकार की नाकामी ही कहेंगे की वे जनपद रुद्रप्रयाग के थाती बड़मा में स्वीकृत सैनिक भवन का निर्माण बजट का प्रावधान नहीं करवा पाये।. हैरान करनी वाली बात तो यह है कि तत्कालिक सैनिक कल्याण मंत्री ने सैनिक कल्याण व मण्डी परिषद से 5-5 करोड़ रूपये धनराशि से साईड डेवल्पमेंट का कार्य तो किया गया लेकिन निर्माण एजेन्सी उत्तर प्रदेश निर्माण निगम द्वारा धरातल पर किये गये कार्यों से अधिक धनराशि खर्च की गई. जिसमें वर्तमान सरकार द्वारा शिक्षा निदेशालय से जाँच करवाई गई और भारी अनिमिता भी उजागर हुई जिस पर निदेशालय द्वारा यूपी निर्माण निगम पर दो करोड़ रुपये रिकवरी का नोटिश जारी कर नाम ब्लैक लिस्ट में दिया गया है.।
आपको बता दे कि वर्ष 2013-14 में जैसे ही थाती.बड़मा में सैनिक स्कूल स्वीकृत हुई तो थाती.बड़मा मुन्नादेवल डंगवागांव ब्राहमण गाँव और सेम के ग्रामीणों ने अपनी सिंचित 13 सौ नाली भूमि दान दे दी. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सैनिक स्कूल खुलने से यहाँ की दबी हुई प्रतिभायें उभर कर आएगी और भारतीय सैना के उच्च पदों पर आसीन होंगे जिससे जनपद रूद्रप्रयाग में विकास का एक नया आयाम भी स्थापित होंगे. लेकिन सकारों की उदासीनता के कारण जहाँ ग्रामीणों की सैकड़ों नाली भूमि बर्बाद हो गई है वहीं इस आधे अधूरे निर्माण कार्य से इसके नीचे बसे गाँवों पर भी अब खतरा मंडरा रहा है।
आपको बता दे कि भले ही केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को दूसरे सैनिक स्कूल की बड़ी सौगात तो दी गई हो लेकिन राजनीतिक दावपेंचों में फँसे जनपद रुद्र्प्रयाग के थाती.बड़मा दिग्धार सैनिक स्कूल का निर्माण शुरू न होना उत्तराखण्ड सरकारों की नाकामी को साफ बता रही है । और इसमे जो सबसे बड़ी बात है जो निकलकर आई है वो है हरक रावत और जरनल खंडूड़ी के बीच का आपसी राजनीतिक दाव पेच जिसकी बलि चढ़ रहा है ये स्कूल । बोलता है उत्तराखंड़ की आज जरनल भुवन चन्द्र खंडूड़ी ओर हरक सिंह रावत जब एक ही पार्टी बीजेपी मे है तो दोनों को पुरानी बातों पर मट्टी डालकर जल्द से जल्द इस सैनिक स्कूल का निर्माण कराना चाइये क्योकि अब कुछ महीने का समय ही जरनल खंडूड़ी के पास है क्योकि फिर लोकसभा के चुनाव हो जायगे ।ओर इस बार जरनल चुनाव लड़ने के मन मे नही है। यदि इस कुछ समय मे ही जरनल अपनी राज्य और केंद्र सरकार से मिलकर जल्द से जल्द बजट का इंतज़ाम करवाकर रुद्रप्रयाग सैनिक स्कूल का निर्माण कराना शुरू करा देते है तो ये जहा उनके लिए राहत की बात होगी ।और उनको खुशी भी।तो दूसरी तरफ आने वाले लोकसभा चुनाव मे पौड़ी से खड़े होने वाले बीजेपी के उमीदवार को इसका लाभ मिलता दिखाई देगा । बहराल इस पूरी रिपोर्ट मे राजनीति और सियासत की बात को छोड़ दिया जाये तो मुझे दुःख इस बात का है कि 3 साल बाद भी रुद्रप्रयाग के सैनिक स्कूल का काम अभी तक अधर पर लटका है । मुख्य मंन्त्री त्रिवेन्द्र रावत जी अगर आप इस पूरे मामले को खुद हरक सिंह और जरनल खडूड़ी ओर केंद्र सरकार से बात करके देखेगे तो उम्मीद है कि रास्ता जल्द निकलेगा ओर यही होगी आप सबकी शहीद जवानों के प्रति भावभीनी ओर एक सच्ची श्रदांजलि । जय उत्तराखंड़ जय जवान ।







