
क्या पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को “मरा हुआ सांप” कहा जा रहा है आखिर किसने ये कहा ?
जिसे गले में लपेटने का इच्छुक कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व भी इस बार नही पूरी रिपोर्ट
उत्तराखंड कांग्रेस में कुछ भी ठीक ना कल चल रहा था ना आज
जिसका फायदा सत्ता में बैठी भाजपा को चुनाव में मिलना तय है क्योकि ये कांग्रेस अभी ये सोचने को तैयार नही की कैसे 11 सीटो से 36 पर आए बजाय इसके घमासान चल रहा है कि
हमारा मुख्यमंत्री ये बनेगा
अब कांग्रेस के कार्यकर्ता और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के वफादार सहयोगी ग्रीस चंद्रा की पोस्ट को पढ़ सकते है
#MissionUttarakhand2022
कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व भी इस बार “मरा हुआ सांप” गले में लपेटने का इच्छुक नहीं है।
क्यूँ पड़े हो चक्कर में ?
कोई नहीं है टक्कर में ??
मुख्यमंत्री 2022 श्री Pritam Singh जिंदाबाद।
#सोनिया_गांधी_जिंदाबाद
श्री Rahul Gandhi जिंदाबाद
#प्रीतम_सिंह_जिंदाबाद
#CM4Uttarakhand2022
इस पोस्ट में सब कुछ ठीक है
ओर प्रीतम सिंह कांग्रेस की सरकार आंने पर प्रबल दावेदार है मुख्यमंत्री के अगर सामूहिक नेतृत्व में चुनाव होते है तो
ओर इस बात से इनकार भी नही किया जा सकता
लेकिन जब दूसरी तरफ इस पोस्ट ki इस लाइन पर नज़र जाती है कि
कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व भी इस बार “मरा हुआ सांप” गले में लपेटने का इच्छुक नहीं है।
तो फेसबुक पर इस पर प्रतिक्रिया का मतलब पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से निकाला जा रहा है
कहने का मतलब ये है कि क्या हरीश रावत को “मरा हुआ सांप” कहा जा रहा है?? क्योंकि
जो कमेंट इस पोस्ट पर आ रहे है वो तो यही कह रहे है
बहराल सवाल अब ये उठता है कि क्या कांग्रेस का हाईकमान भी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को मरा हुवा साँप समझता है या कांग्रेस के कार्यकता
या फिर लोकप्रिय नेता प्रीतम सिंह के सहयोगी उनके वफादार साथी ही हरीश रावत को मरा हुवा साँप समझते है ?
ये महत्वपूर्ण बात है
क्योकि उत्तराखंड कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का अपना कद है
तो हरीश रावत का अपना कद
ऐसे में यदि आपस मे इन नेताओं को लड़ाया जाता है ,या इस तरह नेताओं के सहयोगी कोई भी टिपणी करते है तो उसका नुकसान प्रीतम सिंह या हरीश रावत को जो होगा सो होगा पर उत्तराखंड कांग्रेस को अधिक होगा , ऐसे में जनता के बीच सन्देश गलत जाता है
जिसका खामियाजा कांग्रेस को ही भुगतना होगा जो तय है
अब ये कांग्रेस हाईकामन का विवेक है कि वे इस तरह की फेसबुक पोस्ट को किस तरह लेते है
तो दूसरी बात is तरह की पोस्ट से कांग्रेस के ताकतवर नेता प्रीतम सिंह को फायदा कम नुकसान अधिक होता है
ये राजनीतिक समीकरण कहती है
बाकी साँप तो साँप है मरा हुआ गले मे डालकर कोई अगर घूमे भी तो डर तो लगता ही है कि देखो उसके गले में साँप है
ठीक वैसे ही जैसे जब तक कोई जिंदा है तो हमारा हाथ उसके कंधो पर होता है
ओर मरने के बाद वो मुर्दा कहलाता है
तब लोग उसे हाथ लगाने या उसके सपने में भी आजाने से डर जाते है ये कहना भी कुछ कांग्रेसियों का है










