धामी सरकार-2.O: में पहला घोटाला विवाद मंत्री धन सिंह रावत के नाम , मंत्री पद से इस्तीफा दे धन सिंह रावत की  आवाज़ से गूंज उठा देहरादून पढ़े पूरी रिपोर्ट

आपको बता दे कि धामी : 2.O सरकार में सहकारिता बैंक भर्ती घोटाले का मामला आग की तरह फैलता जा रहा है
विपक्ष चिल्ला चिल्ला कर मंत्री धन सिंह रावत को मुख्य आरोपी करार देते हुए उनको मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग कर रहा है
आज भी सचिवालय गेट के सामने पूर्व PCC अध्यक्ष गणेश गोदियाल की अगुवाई में कही नेता सहित कार्यकर्ताओ ने धरना दिया। ओर नारेबाजी की
वही मंत्री को तत्काल बर्खास्त कर जांच की मांग की।
इस धरने पर नए PCC अध्यक्ष करण माहरा और पूर्व CM हरीश रावत के साथ ही तमाम बड़े दिग्गज शामिल थे।
ईमानदार धामी ओर भाजपा सरकार के लिए ये सहकारिता भर्ती घोटाला बहुत बड़ा सिर दर्द बन गया है
ओर पूरे मामले में सीधे कैबिनेट मंत्री को आरोपों के घेरे में लिया जा रहा है।


सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जिस सहकारिता विभाग में
मंत्री पर भी दाग लगे है !! विपक्ष के अनुसार और जांच भी जारी है ऐसे में ईमानदार धामी ने किसके दबाव में वही महकमा फिर धन दा को सौंप दिया
सोमबार सुबह से ही गणेश गोदियाल ने भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था
वही गणेश गोदियाल ने सुबह धरने पर बैठने के दौरान पत्रकारों से कहा कि पुष्कर और बीजेपी सरकार भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई और साफ-सुथरी सरकार चलाने का दावा कर रही है। दूसरी ओर ऐसे आरोपी को फिर मंत्री बना दिया गया जिनके पिछले कार्यकाल में ही शर्मनाक सहकारिता भर्ती घोटाला हुआ। करोड़ों रूपये नाजायज ढंग से नियुक्तियाँ कर के कमाए गए। जो चुनाव में भी खुल के इस्तेमाल हुए। बीजेपी ने धन सिंह को मंत्री ही नहीं बनाया बल्कि उनको फिर सहकारिता महकमा सौंप दिया। वह जांच को पूरी तरह प्रभावित करने की हैसियत में हैं। उनको बर्खास्त नहीं किया जाता है तो प्रतिभावान लेकिन घूस न दे सकने वालों के साथ ये अन्याय भी होगा
वही प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने कहा कि गणेश ने जो अभियान भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ा है, काँग्रेस उसके साथ है। इस मुहिम में पार्टी पूरी शक्ति के साथ बनी रहेगी। आरोपी मंत्री की बर्खास्तगी और उनके खिलाफ जांच होने तक ये आंदोलन जारी रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दावा करते हैं कि वह न खाएँगे न खाने देंगे, लेकिन उनके मंत्री और धन सिंह ने सहकारिता भर्ती घोटाले को अंजाम दे के उनकी भी खिल्ली उड़ाई है।

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उनकी अवमानना की है। ऐसे मंत्री को एक सेकंड के लिए भी कुर्सी पर रहने का अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री पुष्कर उनको कैसे बर्दाश्त कर रहे हैं, ये सोच के हैरानी होती है। धन सिंह को सरकार और पार्टी में काफी दमदार और प्रभावशाली मंत्री माना जाता है। उनके संपर्क हाई कमान और संघ में भी मजबूत माने जाते हैं। बीजेपी में एक बार ऐसा भी संदेह जताया जा रहा था कि शायद उनको PSD-2.O में मौका न मिले। ये कयास न सिर्फ बुरी तरह गलत साबित हुए बल्कि वह अपने पिछले कार्यकाल वाले सारे अहम और मलाईदार महकमे लेने में कामयाब रहे। स्कूली और प्राथमिक शिक्षा महकमे भी उनकी झोली में आ गए। मुख्यमंत्री के लिए सहकारिता भर्ती घोटाले में मंत्री के घिरने और फंस जाने तथा कांग्रेस के बेहद मुखर होने से कठिन हालात उत्पन्न हो गए हैं।

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उन्होंने जांच तो शुरू करा दी है लेकिन मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई होती दिखा नहीं पा रहे। उनसे सहकारिता महकमा वापिस तक नहीं लिया गया गया है बहराल अब देखना ये होगा कि आगे क्या निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लेते है..

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