
सावधान उत्तरकाशी:- कहीं किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं बार-बार आने वाला भूकंप ?
अब तक 7 साल में 18 बार डोल चुकी धरती, किसी बड़ी आपदा के संकेत तो नहीं?
उत्तरकाशी। पर्वतीय जिले उत्तरकाशी में बार-बार आने वाले भूकंप कहीं किसी बडे खतरे का संकेत तो नहीं ? 20 अक्तूबर 1991 को उत्तरकाशी में रिक्टर स्केल पर 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था। तब भूकंप में भारी तबाही मची थी।
सैकड़ों भवन जमींदोज होने के साथ ही छह सौ से अधिक लोग काल के गाल में समा गए थे। इसके बाद भी जनपद में भूकंप झटकों की निरंतरता बनी हुई है। भूवैज्ञानिक भी क्षेत्र में बड़े भूकंप की आशंका जता चुके हैं। बीते सात सालों के भीतर जिले में रिक्टर स्केल पर 2.5 तीव्रता से अधिक से 18 झटके दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि इनमें किसी तरह का जान माल का नुकसान नहीं हुआ। वर्ष 2013 और 2016 में सर्वाधिक 5-5 भूकंप के झटके दर्ज किए गए। भूवैज्ञानिकों के अनुसार सीमांत जनपद उत्तरकाशी भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन-4 व 5 के अंतर्गत आता है। टैक्टोनिक प्लेट्स जिले के नीचे से होकर गुजर रही हैं। इनमें सामान्य हलचल से ही जिले में भूकंप का खतरा बना हुआ है।
जिला मुख्यालय और आसपास के इलाकों में ही देखें तो मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से भवनों का निर्माण हो रहा है। बेतरतीब ढंग से बस रही घनी बस्तियां भविष्य में बड़ा भूकंप आने पर भारी तबाही की ओर इशारा कर रही है।




