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देहरादून। कोरोनाकाल में भी सिस्टम की लापरवाही के किस्से कम नहीं हो रहे। ताजा मामला दून अस्पताल का है। यहां कोविड वार्ड में एक मरीज ने भर्ती किए जाने के 21 दिन बाद दम तोड़ दिया। अस्पताल की ओर से जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र में मरीज की मौत का कारण कोरोना बताया गया है, जबकि उसकी मृत देह की कोरोना जांच की रिपोर्ट निगेटिव आई। यह सब स्वास्थ्य महानिदेशालय से सेवानिवृत्त एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के साथ हुआ।

शिमला बाईपास निवासी हरि दर्शन बिष्ट ने बताया कि उनके बहनोई एसएस रावत स्वास्थ्य महानिदेशालय से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पद से दो साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। इसी 16 अप्रैल को पेट में दर्द होने पर उन्हें जांच के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्हें अपेंडीसाइटिस की समस्या बताई गई। इसी दौरान उनका कोरोना टेस्ट भी हुआ, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उस समय ज्यादा परेशानी नहीं होने के चलते उन्होंने होम आइसोलेशन में रहकर इलाज कराना तय किया। मगर, हफ्तेभर बाद शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर 23 अप्रैल को उन्हें दून अस्पताल में भर्ती किया गया। वहां शुक्रवार को उनकी मौत हो गई।

हरि दर्शन बिष्ट का आरोप है कि इस अवधि में उनके बहनोई की दोबारा कोरोना की जांच तक नहीं कराई गई। कोविड वार्ड में भर्ती होने के चलते उनकी तबीयत की ठीक-ठाक जानकारी भी नहीं मिल पा रही थी। सुबह तीन बजे उनकी तबीयत बिगड़ी, मगर इसकी जानकारी मौत के बाद दी गई। उनके मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत का कारण कोरोना लिखा गया, जबकि शव का कोरोना टेस्ट कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आई। हरि दर्शन का कहना है कि समय पर जांच होती तो शायद यह नौबत नहीं आती। उनके परिवार ने इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन से की है।

उधर, इस मामले में दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक केसी पंत का कहना है कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। मरीज की पूरी फाइल पढ़ने के बाद ही असल बात सामने आएगी। यह जरूर है कि संक्रमित की रिपोर्ट 14 दिन बाद कोई लक्षण नहीं होने पर निगेटिव आ सकती है। हो सकता है कि मरीज की प्राथमिक चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोरोना लिखा गया हो।

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