पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है कि

पार्लियामेंट में प्रश्न, विकास का एक कारगर हथियार बनाया जा सकता है। मैंने 80 के दशक में अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र के लिये अपने इस अस्त्र के उपयोग से बहुत कुछ हासिल किया।

जब
हरिद्वार की बारी आई तब तक मैं मंत्री बन गया था, लेकिन मैंने उत्तराखंड के लिये बहुत कुछ हासिल किया जो है संसदीय प्रश्नों आदि के जरिए उत्तराखंड की मौलिक आवश्यकताओं पर सरकार का ध्यान खींचा।
एक संसदीय प्रश्न के उत्तर आदि बनाने में बहुत वक्त मेहनत लगती है और यदि कभी मंत्री फंस गये तो आप उनसे बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं। जैसे मैंने, शीतोष्ण मछली_अनुसंधान संस्थान हासिल किया।
ओरिजिनली चंपावत के लिए था, लेकिन कालांतर में उसको चंपावत के बजाय भीमताल में सुविधाओं के दृष्टिकोण से किया गया। उसी तरीके से मैंने हॉर्टिकल्चर के अंदर टेंपरेट फ्रूट्स का अनुसंधान केंद्र उत्तराखंड के लिए हासिल किया। मैं एक उदाहरण वानकी के तौर पर बता रहा हूंँ और आज मुझे बहुत अच्छा लगा जब मैंने अखबारों में पढ़ा कि चाय के विस्तार के लिए क्या कुछ केंद्र की सरकार करेगी और वो बात श्री Anil Baluni जी के प्रश्न से आई।
एक नौजवान सांसद, उत्तराखंड के लिये किस तरीके से हम केंद्रीय धनराशि प्राप्त कर सकते हैं, उस दिशा में कार्यरत हैं। सैद्धांतिक गंभीर मतभेदों के बावजूद भी मैं, वो ऐसा करते रहें इसकी कामना करता हूंँ और यह कामना मैंने उनको टेलीफोन करके भी जाहिर की, उन तक पहुंचाई है।

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ये पोस्ट पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने फेसबुक पेज पर लिखी इससे इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी के कामकाज
ओर कार्य करने की शैली के मुरीद है
छोटे भाई की तरह उन्हें पसंद करते हैं
राजनीति म के क्षेत्र में दोनों  दिग्गजों की पार्टी भले ही अलग अलग हो विचारधारा अलग हो
पर अनिल बलूनी अपने काम से अपने विपक्षियों को भी अपना शुभचिंतक कुछ इस तरह बना लेते हैं जो हर दा की पोस्ट में झलकता है 

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