

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का बृहस्पतिवार दोपहर दिल्ली में साकेत के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया।
20 सिंतबर, 2017 को ब्रेन स्ट्रोक के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ब्रेन स्ट्रोक के इलाज के बाद उनकी फिजियोथैरेपी चल रही थी। कुछ दिन पहले अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा था। 
काठगोदाम में रविवार को अंतिम संस्कार
बृहस्पतिवार देर रात उनका पार्थिव शरीर दिल्ली के तिलक लेन आवास ले जाया गया, जहां शुक्रवार शाम तक लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे। शनिवार सुबह 11 बजे उनका पार्थिव शरीर लखनऊ और फिर रविवार सुबह काठगोदाम (उत्तराखंड) ले जाया जाएगा। यहीं उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
88 की उम्र में उज्ज्वला शर्मा से की शादी
रोहित शेखर ने 2008 में दावा किया कि एनडी तिवारी उनके जैविक पिता हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर हुए डीएनए परीक्षण में रोहित का दावा सही साबित हुआ।
इस दौरान उन्होंने मीडिया से उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की। इसके बाद 2014 में उन्होंने 88 वर्ष की उम्र में रोहित की मां उज्ज्वला शर्मा से लखनऊ में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शादी की। उनकी पहली पत्नी सुशीला सांवल की 1993 में मृत्यु हो गई थी।
राजनीतिक ही नहीं पूरा संस्थान थे एनडी तिवारी
पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के निधन को एक युग की समाप्ति का अंत बताते हुए संत समाज सहित अन्य संगठनों ने उनके निधन पर शोक जताया है।
समाजसेवी एवं शिक्षाविद यूसी जैन ने तिवारी के निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि एनडी तिवारी चाहे केंद्र में मंत्री रहे हों या फिर यूपी और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री। उन्होंने विकास को समर्पित अपनी सोच से विकास का नया अध्याय लिखा। वह कहते थे कि यदि सड़कें नहीं होंगी तो विकास नहीं हो सकेगा।
इसलिए जहां जहां भी उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र स्थापित की वहां पहले सड़कों का निर्माण किया। संत समाज की बैठक में महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद, बाबा हठयोगी आदि ने नारायण दत्त तिवारी के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि विकास का मार्ग तय करने में एनडी तिवारी की भूमिका अहम रही।






