
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि
मुख्यमंत्री के कई दायित्वों में एक दायित्व यह भी था कि वो समय-समय पर कांग्रेस विधानमंडल दल की बैठक बुलाकर अपने सहयोगी सदस्यों को विश्वास में लेते रहें। पंजाब में सीएलपी की मीटिंग कितनी बार हुई! मैं इस अप्रिय प्रसंग को छेड़ना नहीं चाहूंगा। कैप्टन अमरिंदर सिंह जी द्वारा बार-बार मुझे Humiliation किया गया कहना तथ्यों से बिल्कुल विपरीत है। मेरा दायित्व है कि मैं तथ्यात्मक स्थिति को सामने रखूं। कांग्रेस विधानमंडल दल के सदस्यों द्वारा सशक्त तरीके से बहुमत सदस्यों के हस्ताक्षरयुक्त पत्र के माध्यम से सीएलपी मीटिंग बुलाए जाने की मांग के उपरांत हमारे पास बैठक बुलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।
बैठक बुलाने के निर्णय लेने से पहले विधायकों की मांग के विषय में मैंने कई बार बात करने का प्रयास किया। बैठक बुलाने का निर्णय करने के बाद भी मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी से बात करने का प्रयास किया। बैठक के लिए चंडीगढ़ पहुंचने वाले दिन भी मैंने सीधे मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा जो मुझे नहीं मिला। हां, इस तथ्य की जानकारी जरूर हुई कि मुख्यमंत्री 4 बजे, गवर्नर से मिलने जा रहे हैं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने निश्चय के संबंध में कांग्रेस अध्यक्षा जी को भी बता चुके थे। ऐसा निर्णय लेने के लिए उनको कोई सुझाव भी नहीं दिया गया था। अमरिंदर सिंह जी जानते थे कि बैठक में विधायकगण उनसे गुरुग्रंथ साहब की बेअदबी के प्रसंगों, सफेद पोश ड्रग्स, माफिया के खिलाफ कार्यवाही न किए जाने, पंजाब के हित के विरुद्ध किये गये पावर परचेज एग्रीमेंट व बादलों के बस परमिटों के कैंसिलेशन, कैप्टन प्रशासन व बादलों के मध्य सांठ-गांठ से जुड़े सवालों को उठा सकते हैं। उन्होंने इन सवालों से बचने के लिए विधायकों की बैठक में न जाने और बैठक से पहले त्यागपत्र देने का फैसला किया।
उपरोक्त सवाल अचानक नहीं उठे थे। कैप्टन साहब के विरोधी लगातार इन सवालों को उठा रहे थे, बेअदबी प्रकरण में हाईकोर्ट में हुई सरकार की फजीहत के बाद विधायकों का एक बड़ा हिस्सा उनके खिलाफ आवाज उठाने लगा, जिसमें कुछ मंत्रीगण भी सम्मिलित थे।
पार्टी के अंदर हो रही उथल-पुथल को देखते हुए पार्टी ने श्री मलिकार्जुन खड़गे जी के नेतृत्व में 3 सदस्यीय पैनल का गठन किया। पैनल द्वारा 150 से ज्यादा विधायकों/सांसदों, पूर्व विधायकों व पूर्व सांसदों और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बात की गई, जिनमें पीसीसी अध्यक्ष और कैप्टन अमरेंद्र सिंह भी सम्मिलित थे। पैनल के सम्मुख अधिकांश विधायकों ने प्रशासन पर अकाली दल प्रस्त होने और उनकी उपेक्षा करने की बात कही गई। बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह जी के बदले जाने की बात भी कही गई। पैनल व पार्टी ने 18 सूत्र श्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जी से वार्ता कर तय किये और स्थिति को सुधारने व उन पर अमल करने के लिए श्री अमरिंदर सिंह जी को कहा गया। लंबे समय तक कार्रवाई की सूचना न मिलने पर पार्टी नेतृत्व द्वारा पैनल से पुनः कैप्टन अमरिंदर सिंह जी से बात करने के लिए कहा गया। एक समयबद्ध क्रियान्वयन का आश्वासन देने के बाद भी कैप्टन साहब ने सुझावों के ऊपर कोई अमल नहीं किया।
चुनाव नजदीक आ रहे थे। विधायकों व मंत्रियों द्वारा लगातार परिवर्तन के लिए दबाव बनाया जा रहा था। अंतिम प्रयास के रूप में मैं स्वयं चंडीगढ़ गया और मुख्यमंत्री से 18 में से 5 मुद्दों पर समयबद्ध कार्यवाही का आश्वासन लिया। समयावधि बीतने के काफी समय बाद विधायकों के एक बड़े हिस्से द्वारा विधानमंडल दल की बैठक बुलाने की मांग की गई। इन विधायकों का स्पष्ट मानना था कि श्री कैप्टन पार्टी की जीत नहीं चाहते? उन्हें शंका थी कि श्री कैप्टन, अकाली नेताओं से मिले हैं और भाजपा के दबाव में हैं। हमारे सम्मुख विधायकों के आग्रह को मानने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं था। पार्टी को एक बड़े नुकसान से बचाने के लिए बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। मैंने लगातार श्री अमरिंदर सिंह जी से बात करने का प्रयास किया। बैठक बुलाने के निर्णय वाले दिन भी मैंने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया, संपर्क न होने के अभाव में मैंने उनके कार्यालय, उनके सहयोगियों व शुभचिंतकों को बैठक बुलाने की जानकारी दी और मैसेज भेजकर जानकारी देने के साथ-साथ उनसे बैठक में भाग लेने का अनुरोध किया। बैठक के दिन भी प्रातः उन्हें स्थिति की सूचना दी और 12 बजे, दोपहर में मिलने का समय मांगा।
यह कहना अन्यायपूर्ण है कि पार्टी नेतृत्व अमरिंदर सिंह जी के विरुद्ध था। हां, श्री अमरिंदर सिंह जी को स्थिति सुधारने के लिए बहुत बार कहा गया, मैंने खुद उनसे 6 बार विस्तृत चर्चा की और उत्पन्न हो रहे हालात से अवगत कराया। मैंने उनको मंत्री और विधायकों में व्याप्त बेचैनी से भी अवगत कराया, उन्हें संबंधित लोगों से बात कर समाधान ढूंढने का आग्रह भी किया। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट हो जाता है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जी वस्तुस्थिति को नहीं समझना चाहते थे और पार्टी हाईकमान व पार्टी अनुशासन के नाम पर विधायकों से चुप रहने की अपेक्षा कर रहे थे, बदले हुए हालात में ऐसा संभव नहीं हो पाया। अंततः उन्हें त्यागपत्र देने का निर्णय करना पड़ा। विधानमंडल दल ने सर्वसम्मत प्रस्ताव के जरिए लंबे समय तक विधानमंडल दल और पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया। पार्टी द्वारा अपमानित किए जाने की बात, श्री अमरेंद्र सिंह जी की अमित शाह जी से हुई भेंट के बाद उठी है। श्री चरणजीत चन्नी जी के मुख्यमंत्री पंजाब बनने का सबने स्वागत किया है। उन्हें कर्तव्य पालन में सहयोग और समर्थन देना, हम सबका नैतिक कर्तव्य है।




