
रंजना नेगी की रिपोर्ट
उत्तराखंड का सबसे लोकप्रिय अस्प्ताल श्री महंत इंदिरेश अस्पताल ने एक तीन साल की एक बच्ची को नया जीवन दिया है। जिससे उस बच्ची के माता पिता के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान वापस लौट आई है । आपको बता दे कि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में एमआइसीएस तकनीक से तीन साल की एक बच्ची की सफल हृदय शल्य चिकित्सा की गई। एमआइसीएस (मिनिमल इनवेसिव कार्डियक सर्जरी) मॉडर्न हार्ट सर्जरी की तकनीक है। श्री महंत इंदिरेश में पिछले तीन वर्षों से इस तकनीक से सर्जरी की जा रही है। आपको बता दे कि अस्प्ताल के
डॉ. अशोक जयंत को हार्ट सर्जरी का लगभंग 35 वर्षों का अनुभव है। आपको बता दे कि बच्चों की हार्ट सर्जरी के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत श्री महंत इंदिरेश अस्पताल अनुबंधित है।
शनिवार को अस्पताल के सभागार में चिकित्साधीक्षक डॉ. विनय राय, डॉ. अशोक जयंत, डॉ. अमर उपाध्याय, डॉ. हरिओम एमडी एनेस्थीसिया ने पत्रकार वार्ता में एमआइसीएस तकनीक की जानकारी दी। बताया कि कालसी देहरादून निवासी बेबी अवनि रावत (तीन साल) पुत्री मुकेश रावत को जन्म से दिल में छेद था, उसकी एक जुड़वा बहन भी है। अवनि की मां ने बताया कि दोनों बहनों का जन्म के बाद समान मानसिक और शारीरिक विकास हो रहा था।
लेकिन, उम्र बढ़ने के साथ अवनि को खांसी-जुकाम रहने लगा और उसका विकास भी कम हो गया। जब उन्होंने बच्ची की जांच करवाई, तो उसके दिल में सुराख के बारे में पता चला। उन्होंने श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में परामर्श लिया। सबसे पहले डॉ. अमर उपाध्याय ने अवनि के रोग को डायग्नोज किया, उसके बाद डॉ. अशोक जयंत और उनकी टीम ने एमआइसीएस तकनीक से अवनि की हार्ट सर्जरी की। सर्जरी के बाद अवनि बिल्कुल स्वस्थ है।
यही नही आज श्री महंत इंदिरेश अस्प्ताल मै हर बीमारी का इलाज ओर बढ़े ऑपरेशन भी विशेष तकनीक के द्वारा किये जा रहै है ।

तो जरूरमंद लोगो का लगातार निःषुल्क इलाज़ किया जा रहा है । तो किसी का 50 फीसदी छूट पर । इतने कम समय मे ये अस्प्ताल जनता की पहली पसंद का अस्प्ताल बन गया है ।क्योंकि यहा हर डॉक्टर अनुभवी है और काउंसलिंग भी अन्य अस्पताल से बेस्ट है मरीज को ओर उनको यहा लाने वाले भर्ती कराने वाले परिवार के लोगो को बहुत ही अच्छे तरिके से समझाया जाता है । और उन्हें बेहतर इलाज देकर संतुष्ट किया जाता है।





