
स्वामी सानंद के बाद अब गंगा के लिए बलिदान की राह पर संत गोपालदास, मातृसदन में अनशन पर बैठे
केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार जहा अभी स्वामी सानंद की मौत के बाद विपक्ष से लेकर संत समाज के निशाने पर है तो ऐसे मे अब गंगा की अविरलता की मांगों को लेकर अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के देहावसान के बाद एक और संत बलिदान देने की राह पर बढ़ गए हैं। आपको बता दे कि गुहाना हरियाणा के रहने वाले संत गोपालदास पिछले 111 दिनों से उत्तराखंड के अलग-अलग स्थानों पर अनशन कर रहे थे।
शुक्रवार को वह जल पुरुष राजेंद्र सिंह के साथ हरिद्वार पहुंचे। अब वह यहां मातृसदन में ही रहकर अनशन करेंगे। स्वामी सानंद का आमरण अनशन के 112वें दिन बृहस्पतिवार को ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में देहावसान हो गया था।
स्वामी सानंद की मौत को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच एक और गंगा भक्त संत शुक्रवार को मातृसदन पहुंचे। जलपुरुष राजेंद्र सिंह और जानेमाने पर्यावरणविद रवि चोपड़ा के साथ आए संत गोपालदास ने बताया कि वह भी गंगा की रक्षा के लिए पिछले 111 दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं।
जानकारी अनुसार
पहले उन्होंने बदरीनाथ, जोशीमठ और फिर ऋषिकेश में आमरण अनशन किया। उन्होंने अनशन की शुरूआत 24 जून को की थी। तीन दिन पहले से वे जल भी त्याग चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका अनशन स्वामी सानंद के अनशन के समर्थन में है और अब वह मातृसदन में ही रहकर उसी कमरे में अनशन करेंगे जहां स्वामी सानंद ने अनशन किया था।
आपको बता दे कि स्वामी शिवानंद, जल पुरुष रोजेंद्र सिंह, पर्यावरणविद रवि चोपड़ा, अधिवक्ता अरुण भदौरिया और हिंदू क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव चौधरी आदि के आग्रह पर गोपालदास ने जल तो ग्रहण कर लिया, लेकिन गंगा की अविरलता की मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कही।
खबर है कि गोपालदास के अनशन की सूचना मिलते ही जिला और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। खुफिया विभाग ने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी तो अधिकारी संत गोपालदास के अनशन को समाप्त कराने के तरीके तलाशते नजर आए।
जानकारी अनुसार मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि संत गोपालदास अब यहीं अनशन करेंगे। गोपालदास के साथ आए गंगा आह्वान के संयोजक हेमंत ध्यानी ने बताया कि गोपालदास वर्ष 2011 में स्वामी निगमांनद के बलिदान से पहले मातृसदन में ही काफी समय तक रहे।
उस समय उन्होंने स्वामी निगमानंद की काफी सेवा की थी। स्वामी निगमानंद के बलिदान से ही उन्हें गंगा और पर्यावरण के प्रति कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिली। बाद में वे गुहाना हरियाणा चले गए जहां उन्होंने गौचरान की भूमि बचाने को बड़ा आंदोलन चलाया।
बीते जून में उत्तराखंड की यात्रा पर आने के दौरान उन्होंने हिमालय में तबाही का मंजर देखा तो हिमालय और गंगा को बचाने के लिए 24 जून से अनशन पर बैठ गए।
बहराल माँ गंगा की अविरल धारा के लिए माँ गंगा के तीन पुत्रो ने अपना बलिदान दे दिया । ओर अब फिर एक बार एक ओर गंगा पुत्र अनशन पर बैठ गए है। राजनीति करने वालो ने , ओर नेताओ ने हर बार गंगा के नाम पर सियासत की है , आस्था के साथ खिलवाड़ भी हुवा होगा! तो संत सामाज ने बलिदान दिया । अब देखना ये होगा की माँ गंगा को आगे क्या क्या ओर देखने और सुनने को मिलता है
केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार जहा अभी स्वामी सानंद की मौत के बाद विपक्ष से लेकर संत समाज के निशाने पर है तो ऐसे मे अब गंगा की अविरलता की मांगों को लेकर अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के देहावसान के बाद एक और संत बलिदान देने की राह पर बढ़ गए हैं। आपको बता दे कि गुहाना हरियाणा के रहने वाले संत गोपालदास पिछले 111 दिनों से उत्तराखंड के अलग-अलग स्थानों पर अनशन कर रहे थे।
शुक्रवार को वह जल पुरुष राजेंद्र सिंह के साथ हरिद्वार पहुंचे। अब वह यहां मातृसदन में ही रहकर अनशन करेंगे। स्वामी सानंद का आमरण अनशन के 112वें दिन बृहस्पतिवार को ऋषिकेश स्थित एम्स अस्पताल में देहावसान हो गया था।
स्वामी सानंद की मौत को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बीच एक और गंगा भक्त संत शुक्रवार को मातृसदन पहुंचे। जलपुरुष राजेंद्र सिंह और जानेमाने पर्यावरणविद रवि चोपड़ा के साथ आए संत गोपालदास ने बताया कि वह भी गंगा की रक्षा के लिए पिछले 111 दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं।
जानकारी अनुसार 
पहले उन्होंने बदरीनाथ, जोशीमठ और फिर ऋषिकेश में आमरण अनशन किया। उन्होंने अनशन की शुरूआत 24 जून को की थी। तीन दिन पहले से वे जल भी त्याग चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका अनशन स्वामी सानंद के अनशन के समर्थन में है और अब वह मातृसदन में ही रहकर उसी कमरे में अनशन करेंगे जहां स्वामी सानंद ने अनशन किया था।
आपको बता दे कि स्वामी शिवानंद, जल पुरुष रोजेंद्र सिंह, पर्यावरणविद रवि चोपड़ा, अधिवक्ता अरुण भदौरिया और हिंदू क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव चौधरी आदि के आग्रह पर गोपालदास ने जल तो ग्रहण कर लिया, लेकिन गंगा की अविरलता की मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कही।
खबर है कि गोपालदास के अनशन की सूचना मिलते ही जिला और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। खुफिया विभाग ने उच्च अधिकारियों को जानकारी दी तो अधिकारी संत गोपालदास के अनशन को समाप्त कराने के तरीके तलाशते नजर आए।
जानकारी अनुसार मातृसदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि संत गोपालदास अब यहीं अनशन करेंगे। गोपालदास के साथ आए गंगा आह्वान के संयोजक हेमंत ध्यानी ने बताया कि गोपालदास वर्ष 2011 में स्वामी निगमांनद के बलिदान से पहले मातृसदन में ही काफी समय तक रहे।
उस समय उन्होंने स्वामी निगमानंद की काफी सेवा की थी। स्वामी निगमानंद के बलिदान से ही उन्हें गंगा और पर्यावरण के प्रति कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिली। बाद में वे गुहाना हरियाणा चले गए जहां उन्होंने गौचरान की भूमि बचाने को बड़ा आंदोलन चलाया।
बीते जून में उत्तराखंड की यात्रा पर आने के दौरान उन्होंने हिमालय में तबाही का मंजर देखा तो हिमालय और गंगा को बचाने के लिए 24 जून से अनशन पर बैठ गए।
बहराल माँ गंगा की अविरल धारा के लिए माँ गंगा के तीन पुत्रो ने अपना बलिदान दे दिया । ओर अब फिर एक बार एक ओर गंगा पुत्र अनशन पर बैठ गए है। राजनीति करने वालो ने , ओर नेताओ ने हर बार गंगा के नाम पर सियासत की है , आस्था के साथ खिलवाड़ भी हुवा होगा! तो संत सामाज ने बलिदान दिया । अब देखना ये होगा की माँ गंगा को आगे क्या क्या ओर देखने और सुनने को मिलता है।





