ये नही कहते त्रिवेंद्र सिंह रावत जिंदाबाद ,तब भी सरकार दायित्वधारी मंत्रियों के ठाठ बाट का रखते है पूरा ध्यान , अब मानदेय दोगुना करने जा रहे इनका सरकार

ये नही कहते त्रिवेंद्र सिंह रावत जिंदाबाद ,तब भी सरकार दायित्वधारी मंत्रियों के ठाठ बाट का रखते है पूरा ध्यान ,
अब मानदेय दोगुना करने जा रहे इनका सरकार

ख़बर है कि त्रिवेंद्र  सरकार अब दायित्वधारियों के ठाठ बाट और अधिक बढ़ाने वाली है और ये सब कुछ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर उनके मानदेय में एक बार फिर दोगुनी वृद्धि का प्रस्ताव तैयार हो चुका है

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बता दे कि त्रिवेंद्र सरकार ने विभिन्न निगमों, परिषदों, आयोगों और समितियों में कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और अन्य पदों पर 74 से अधिक दायित्वधारी नियुक्त किए हैं।
इससे पहले त्रिवेंद्र
सरकार ने जुलाई 2019 में दायित्वधारियों का मानदेय बढ़ाया था।
उस दौरान कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त का मानदेय 20 हजार से 45 हजार रुपये, राज्यमंत्री का 15 हजार से 40 हजार रुपये और अन्य दर्जाधारियों का 13 हजार से 35 हजार रुपये मासिक किया गया था

मीडिया मैं चर्चा है कि ओर सूत्रों की माने तो दायित्वधारियों के मानदेय में वृद्धि का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा दिया गया है।
अब विभाग से सहमति मिलने के बाद मुख्यमंत्री प्रस्ताव पर अंतिम अनुमोदन देेंगे। ओर फिर इसके बाद आदेश जारी कर दिया जाएगा। ओर उन सबकी हो जाएगी मोजा जी मौजा ।
इतना हो सकता है आपक मासिक हिसाब किताब।

कैबिनेट मंत्री  के लिए  प्रस्तावित(रु) 90 हज़ार है जबकी अभी 45 हजार   मिल रहा है

राज्य मंत्री  के लिए  प्रस्तावित(रु) 80 हज़ार है जबकी अभी 40 हजार   मिल रहा है
वही दायित्वधारी  के लिए
प्रस्तावित(रु) 70 हज़ार है जबकी अभी 35 हजार   मिल रहा है

बहराल समय की मांग भी है और मासिक वेतन मैं इज़ाफ़ा भी होना चाइए ।
लेकिन सवाल इस बात का है कि कुछ दर्जन भर दाइत्व धारी , राज्य मंत्री , या जिन्हें केबीनेट मंत्री का स्तर दिया गया है उन्हें छोड़कर
50 से अधिक ना तो विकास के काम काज मैं जब से बने है अब तक कुछ करते दिखाई दिये,
ओर ना कभी किसी मौके पर त्रिवेंद्र रावत जिंदाबाद बोलते दिखे।उल्टा हर बार ऐसे नेताओं को कभी भाजपा कार्यलय
के अंदर या कही और
ये चर्चा करते जरूर सुना कि
विधानसभाओ मैं काम नही हो रहे है पार्टी के कार्यकर्ताओं के
अब क्या क्या बोलू
सरकार को सब मालूम है ही बस इतना ही कहता है बोलता उत्तराखंड की जिनको जो जिमेदारी दी गई है उनकी जवाब देही भी रहे।
ओर जिसके लिए मासिक वेतन मैं इजाफा किया जा रहा है कम से कम उसी को अपना कर्म समझते हुए 50 फीसदी ही सही लग्न से अपने दाईत्व को तो समझे। तो बात फिर भी सही है।

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