*सहकारी मंत्री धन सिंह रावत सहकारी बैंक भर्ती घोटाला तो अधिकारियों और राजनेताओं को बड़ा गठजोड़ लग रहा है !!  इसकी क्यो ना हो S I T की जांच??

आपको बता दे कि उत्तराखंड सहकारी बैंक में कथित चतुर्थ श्रेणी भर्ती घोटाले की जांच शुरू हो गई है. ऐसे में जांच टीम ने मंगवालर को देहरादून में डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक में पहुंची, जहां टीम ने कुछ जरूरी दस्तावेज खंगालकर उन्हें अपने कब्जे में लिया. सोमवार को टीम ने डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के दफ्तर को सीज कर दिया था.
बताया जा रहा है कि इस जांच की आंच कई अधिकारियों के गिरेबान तक पहुंच सकती है. टीम ने संदेह के घेरे में कई अधिकारी हैं. हालांकि, अभी तक जांच टीम ने किसी भी अधिकारी का नाम उजागर नहीं किया है. बताया जा रहा है कि ये भर्ती घोटाला देहरादून, पिथौरागढ़ और नैनीताल में हुआ था.

वही सूत्र कहते है कि एक ही परिवार के कई लोगों की चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की गई है. ऐसे में इस भर्ती घोटाले के पीछे अधिकारियों और राजनेताओं को बड़ा गठजोड़ लग रहा है. अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर अपने रिश्तदारों को ही नौकरी पर रखा है.
बता दें कि ये मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद जांच कमेटी गठित करने का आदेश दिया था और 15 दिन का समय दिया था. वहीं, सचिव मीनाक्षी सुंदरम ने भी जांच के आदेश जारी कर दिए थे. इसके बाद टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी है.
वही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि ये पूरा मामला पहले ही सामने आ गया था, इसके बाद नियुक्तियों पर रोक लगाई गई थी, लेकिन सहकारी बैंकों के प्रबंधकों ने सरकारी आदेश को ताक पर रखकर नया खेल खेला और इस भर्ती घोटाले को अंजाम दिया. इस घोटाले के साथ इसकी भी जांच होनी चाहिए कि ये सब किसके इशारे पर किया गया.
इस पूरे खेल के साथ उत्तराखंड क्रांति दल के बड़े नेता शिव प्रसाद सेमवाल ने भी एक और मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा है कि सचिव महाप्रबंधक वंदना श्रीवास्तव को सेवा विस्तार कैसे कर दिया गया? जबकि वह कई मामलों में दागदार रही हैं.
सेमवाल के अनुसार कोऑपरेटिव बैंक में सबसे पहले बैंक के सचिव, डायरेक्टर और अध्यक्ष को हटाकर किसी दूसरे को उनकी जगह तैनात किया जाए, तभी इस मामले में निष्पक्ष जांच हो सकती है. इसके साथ ही घोटाले में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. ताकि अन्य विभागों ने ऐसा फर्जीवाड़ा न हो.

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वही विपक्ष इस पूरे मामले में
S I T की जांच की माग कर रहा है तो शोसल मीडिया में इस समय धामी सरकार की फ़जीहत हो रही है

वैसे सवाल ये उठता है की जब ये सब कुछ हो रहा था तो सहकारी मंत्री धन सिंह रावत क्या कुंभकर्णी नींद में सोए हुए थे या उनके कानों तक ये आवाज़ ही सुनाई नही दी या फिर जानकर मंत्री जी अंजान बने रहे!!
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री धामी पर अब S I T की जांच कराने का दबाव बढ़ता जा रहा है

बहराल यदि मुख्यमंत्री धामी को ईमानदार सरकार चलानी है तो इस पूरे प्रकरण की एसआईटी जांच करानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाए ओर विपक्ष को भी जवाब मिल जाए
यदि ऐसा होता है तो मोदी धामी की सरकार के प्रति लोगो का मजबूत विश्वास और मजबूत होगा खासकर युवाओं का बाकी निर्णय  तो मुख्यमन्त्री को करना है  

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