उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिले से ऐसा कोई महीना नही जब ये दुःखद ख़बर सामने ना आती हो बाघ ने किसी बच्चे को अपना निवाला बना दिया , इस गुलदार या बाघ ने इस महिला को मोत के घाट उतार दिया
आदि आदि
जी हा बाघ आये दिन पहाड़ो में रहने वाले लोगो के जानवरों को तो मार कर खा ही रहा है अब लोगो की जान ले रहा है

क्योकि अब देवभूमि उत्तराखंड के पहाड़ो से लेकर हरिद्वार तक गुलदार की आहट, हमले और लोगों की मौत की खबरे आम बात होती जा रही है..
आपको बता दे कि वन विभाग द्वारा जारी चौकाने वाले आंकड़ों पर गैर फरमाएं तो राज्य गठन के 20 सालों में गुलदार के हमलों में लगभग 400 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं!
आपको बता दे कि गढ़वाल हो या कुमाऊँ हर जगह ( बाघ) गुलदार ने गांव गांव की आबादियों में अपनी दस्तक देकर पहले उनके जंगली जनवरी को अपना निवाला बनाया फिर अब ये बाघ मनुष्य को निशाना बना रहा है
जिससे पहाड़ के लोग दहशत मे जीते है । गांव के लोग को एक ही खौफ रहता है कि ना जाने किस झाडियों से घात लगाए गुलदार ( बाघ ) हमला कर दें.
कुछ लोग कहते है कि इसके पीछे के कारण गुलदारों की संख्या में बढ़ोतरी, गामीण क्षेत्रों के आसपास अधिक झाड़ियों का होना,जंगलों में आग से भोजन की कमी बढ़ना और सिकुड़ते जंगल को माना जाता है. लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो फरवरी से मई जून तक जंगलों में आग की घटनाओं से भी गुलदार प्रभावित होता है. . इस दौरान ठिकाना छिनने से गुलदार तनाव में रहता है और मानव आबादी की ओर रुख करता है. 
वहीं वन विभाग द्वारा किसी क्षेत्र में गुलदार के देखे जाने और हमले के बाद पिंजरा लगाया जाता है, लेकिन गुलदार इस झांसे में नहीं आता, वह पिंजरे से दूर ही रहता है. ओर मनमौजी वन विभाग के अफसर की टीम ट्रैंकुलाइज करने के लिए जंगलों की खाक छानती रहती है. ऐसे में देवभूमि के लोगों के जेहन में एक ही सवाल कौंध रहा है कि कब उन्हें गुलदार के आतंक से निजात मिल पाएगी ? और वे बेखौफ होकर सकून की जिंदगी व्यतीत करेंगे
इस पूरे मामले पर 20 साल से सिर्फ खाना पूर्ति हो होते देखा जा रहा है
लेकिन आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन महकमे के अफसरों के साथ वन विभाग की समीक्षा बैठक की जिसमें सभी पहलुओं पर बात हुई और मुख्यमंत्री धामी ने वन महकमे के अफसरों को उचित दिशा निर्देश दिए
लेकिन जब बात आये दिन बाघ के हमलो कि आई तो मुख्यमंत्री धामी ने वन महकमे के अफसरों को साफ हिदायत दे डाली की खाना पूर्ति के लिए काम ना किया जाए ..
इससे पहले जो चलता था वो अब नही चलने वाला
उचित कदम उठाये जाए
साथ ही सूत्र कहते है कि धामी ने कहा कि यदि भविष्य में उन्हें कहीं से जानकारी मिली यह खबर उन तक आई कि बच्चे को गुलदार गांव से उठाकर ले गया है तो
वहा के वन महकमे के अफसर से लेकर  उनकी पूरी टीम की खैर नहीं
बहराल मुख्यमंत्री धामी की सीधी बात से वन महकमें के अफसरशाही में हलचल मचना वाज़िब है बस अब देखना ये है की कुछ बिगड़ेल नौकरशाह कब तक पटरी पर लौट आते है

 

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