उत्तराखंडः ऐसे फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाता था नाबालिग युवक, पुलिस ने किया गिरफ्तार तो सुनाई पूरी कहानी…

उत्तराखंड में लगातार फर्जी कोरोना रिपोर्ट का खुलासा हो रहा है। एसओजी ने देहरादून में फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट तैयार करने के मामले में एक 12वीं के छात्र को गिरफ्तार किया है। आरोपी छात्र शहर के एक प्रतिष्ठित लैब के नाम पर फर्जी निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट तैयार कर ग्राहकों को देता था। इसके एवज में वह ग्राहकों से 150 रुपये लेता था।

शहर में फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट तैयार होने की जानकारी लगातार एसओजी मिल रही थी। इसके पर एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर एसओजी प्रभारी ऐश्वर्यपाल सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया।

एसओजी प्रभारी ऐश्वर्यपाल सिंह ने बताया कि मुखबिरों की सूचना के बाद देर रात एक 12वीं के छात्रा को इंद्रेश नगर लक्ष्मण चौक से पकड़ा गया। उसके कब्जे से कोरोना टेस्ट की फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए।  नाबालिग होने के कारण पुलिस ने उसे आवश्यक कार्रवाई के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
निजी लैब के नाम पर बनाता था फर्जी निगेटिव रिपोर्ट 
एसओजी प्रभारी ऐश्वर्यपाल सिंह ने बताया कि आरोपित शहर के प्रतिष्ठित आहूजा लैब के नाम से फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह 12 वीं का छात्र है और एक मोबाइल की दुकान में काम करता है। उसे मोबाइल की अच्छी जानकारी है। उसने मोबाइल पर पिक्स आर्ट व एडोब लाइट रूम व अन्य एप डाउनलोड किए थे।

उसने आहूजा लैब की ऑनलाइन आरटीपीसीआर रिपोर्ट निकाली। इसके बाद उसने एप के माध्यम से इस रिपोर्ट को एडिट कर अपनी फर्जी आरटीपीसीआर निगेटिव रिपोर्ट निकाली। कहा कि वर्तमान में कई लोग ऐसे हैं जिन्हें निगेटिव रिपोर्ट चाहिए है। उसने ऐसे लोगों को अपनी फर्जी रिपोर्ट दिखाकर यकीन दिलाया कि वह बिना सैंपल के ही आहूजा लैब की आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव रिपोर्ट तैयार करता है। आरोपी ने बताया कि उसने कई लोगों को फर्जी रिपोर्ट दी।

प्रति रिपोर्ट की लेता था 150 रुपये
आरोपित ने बताया कि फर्जी रिपोर्ट का वह प्रति रिपोर्ट 150 रुपये लेता था। आरोपी ने बताया कि यह काम वह केवल पैंसों के लालच के लिए करता था। कहा कि कई लोगों को बाहर आने जाने के लिए फर्जी रिपोर्ट की आवश्यकता पड़ती  थी। वह ऐसे ही लोगों को यह रिपोर्ट देता था। बताया कि अब तक कई लोगों को वह फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट उलब्ध करा चुका है।

कोरोना के दौरान फर्जी रिपोर्ट, उपकरणों, इंजेक्शन की कालाबाजारी पर पुलिस लगातार नगर रख रही है। हाल ही में ब्लैक फंगस बीमारी में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शनों की कालाबाजारी का खुलासा किया था। अब फर्जी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बनाने का मामला पकड़ा गया है। अगर किसी को इसकी सूचना है तो वह पुलिस से संपर्क कर सकता है।
– डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी देहरादून

 

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