अब हमें गर्व है कि हम उत्तराखंडी हैं , हमारी बोली भाषा आज के वर्तमान समय मे कहीं विलुप्त होते जा रही है । कहीं हमारी आने वाली पीढ़ी हमारी बोली भाषा को भूल न जाये इस लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक सराहनीय कदम उठाया गया है ।

अब विद्यालयों में कुमाउनी और गढ़वाली भाषा को अन्य अनिवार्य विषयों की तरह ही पढ़ाया जाएगा । जिसका सीधा – सीधा मकसद हमारी भाषा को आगे बढ़ना और आने वाली पीढ़ी को अपनी मातृ भाषा को सीखना है।

इसके लिए विद्यालयो में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी जो कि गढ़वाली और कुमाउनी भाषा बोलने और पढ़ने में कुशल होंगे।

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मातृभाषा को बढ़ाने के लिए कक्षा 1 से लेकर 5 तक स्कूलों में कुमाँऊनी , गढ़वाली सहित गुरमुखी, जौनसारी भाषा भी पढ़ाई जाएगी ।

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