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मित्रो अभी कोरोना की दूसरी लहर थमी नहीं है प्रधानमंत्री भी चेता चुके है
पर हाईकोर्ट के निर्देश पर धामी सरकार जब तक सख्ती बरतती, तब तक देशभर से पर्यटकों का रेला कोविड गाइडलाइंस को दरकिनार कर उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की ओर उमड़ पड़ा। उत्तराखंड के बॉर्डर पर आसानी से एंट्री मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने पर्यटन स्थलों से पहले चेकपोस्ट पर पर्यटकों को जांच के लिए रोका तो जाम के अभूतपूर्व हालात पैदा हो गए।

निगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट, स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर
पंजीकरण और होटल की बुकिंग की जांच में उलझे पर्यटकों का पूरा दिन सड़कों पर ही बीत गया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियम की तो हर जगह धज्जियां उड़ाईं गईं। पर्यटकों में न तो कोरोना संक्रमण का डर दिखा और न ही प्रधानमंत्री की अपील का असर , वे तो जाम में भी सड़क किनारे पार्टी करते दिखे।
  बता दे कि इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने सरकार की लगातार दी जा रही पर्यटन संबंधी ढील पर संक्रमण के रोकथाम के उपायों पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए थे। इस पर प्रदेश सरकार पर्यटन स्थलों पर जाने के लिए नेगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट और स्मार्ट सिटी पोर्टल पर पंजीकरण की अनिवार्यता लागू कर दी लेकिन प्रदेश में एंट्री पर सख्ती नहीं बरती।
लिहाजा शनिवार को दिन निकलते ही हर तरफ से पर्यटकों का रेला उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों की ओर बढ़ने लगा। ऐसे  में जब पर्यटन स्थलों से ऐन पहले चेकपोस्ट पर जांच के लिए पर्यटकों को रोका गया तो दोपहर तक कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
 हरकी पैड़ी पर दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान के यात्रियों की भीड़ हरिद्वार में टूट पड़ी। कोविड नियमों की धज्जियां उड़ीं। हर तरफ अव्यवस्था रही। पुलिस ने उन्हीं लोगों को मूसरी जाने दिया जिनके पास नेगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट, स्मार्ट सिटी के पोर्टल पर पंजीकरण और होटल की बुकिंग के कागजात पूरे थे।  भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की ओर से कोठालगेट, किमाड़ी, सहस्त्रधारा से पहले बैरियर लगाए गए थे।  दिन चढ़ने के साथ वाहनों का तांता लगने लगा और देखते ही देखते जाम मसूरी डाइवर्जन तक पहुंच गया।  कागज पूरे न होने पर लगभग 1500 चौपहिया और 500 से अधिक दोपहिया वाहनों को लौटाया गया।
टिहरी गढ़वाल सीमा में स्थित कैंपटी फॉल में नहाने और घूमने के लिए सिर्फ 50 लोगों को आधे घंटे (30 मिनट) का वक्त दिया गया।  इसके लिए पुलिस ने टोकन व्यवस्था की। आधा घंटा होते ही पुलिस का सायरन बजा और सैलानियों को निकाल कर दूसरा दल भेजा गया।  
सहस्त्रधारा में अनावश्यक भीड़ को रोकने के लिए पुलिस की ओर से दो जगह बैरियर लगाए गए। एक शहर से आने वालों वाहनों की चेकिंग के लिए दूसरा मालदेवता से आने वाले वाहनों की चेकिंग के लिए। उधर आशारोड़ी पर भी पुलिस जांच के बाद ही दूसरे राज्यों के पर्यटकों को शहर में प्रवेश दिया गया। जबकि कोरोना गाइडलाइन से संबंधित कागज पूरे न होने पर पुलिस की ओर से करीब एक हजार से अधिक वाहनों को लौटाया गया।

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नैनीताल में भी दोपहिया वाहन सवारों को एंट्री नहीं मिली
नैनीताल। दिनभर में लगभग 14 हजार सैलानी नैनीताल पहुंचे। बाहर से आने वाले दोपहिया वाहनों को नगर में नहीं आने दिया गया। दोपहिया से आए सैलानी शटल सेवा से नगर में पहुंचे। उन्हीं सैलानियों के वाहनों को शहर में आने दिया गया, जिनके पास होटल बुकिंग की रसीदें थीं।

ऋषिकेश में सैलानियों की भीड़ से राजमार्ग पर दिनभर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही

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