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संपूर्ण विश्व आज कोरोना महामारी से लड़ने व जीतने का प्रयास कर रहा है सामाजिक संस्थाए भी सीमित संसाधनों के माध्यम से सरकार व जनता का साथ दे रही है परंतु इस कोरोनो आपदा में भी कुछ लोग गिद्ध बन आपदा में अवसर तलाश अपने ही देश की जनता को लूटने में लगे है। ऑक्सीजन गैस ,आई सी यू बैड, वेंटीलेटर के नाम पर धोखा व लूट चरम पर प्रतीत होती है। उत्तराखंड में भी इलाज के नाम पर अस्पतालों की लूट जारी है।

भले ही उत्तराखंड सरकार ने वर्तमान में सभी प्रकार के निजी अस्पतालों में ईलाज के लिए मूल्य निर्धारित कर जनता को सचेत करने के लिए रेट लिस्ट अस्पतालों पर लगाने के आदेश दिए है पर कुछ अस्पताल सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे है इसी कडी में पारस दून अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अस्पताल द्वारा जारी लूट का एक बिल साक्ष्य के रूप में सामने आया है जिसमे कमरे,डॉक्टर,नर्स,अन्य कर्मचारी के खर्च के साथ साथ मेडिकल गैस के नाम पर आठ हजार रुपये प्रतिदिन की लूट की गई उसके बाद भी 27 साल के नौजवान की मृत्यु हो गई।

अस्पतालों की लूट परिजनों से लाखों रुपये वसूलने के बाद ही मृत्यु के पांच घण्टे बाद शव दिया गया। परिजनों को दिए गए धन वसूली की रसीद /बिल में अन्य बहुत सी खामिया भी है।यह गहन जांच का विषय है की इस तरह की लूट करने को इन लोगो को किसका संरक्षण प्राप्त है। सामाजिक संस्थाओं का आरोप है कि यह प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की नाकामी का एक प्रमाण है।

पारस दून अस्पताल 5 न्यू रोड निकट दून अस्पताल जो की जनता को दून अस्पता ल के नाम पर भ्रमित तो करता ही है एक छोटे से स्थान पर बना है जिसमे प्रवेश व निकासी की कोई उचित व्यवस्था नही,ईमारत के बेसमेंट जो पार्किंग के लिए है उसको गोदाम व मरीजो के साथ आये परिजनों को बैठने के लिए उपयोग किया जा रहा है। सरकार ने कैसे ऐसे स्थान पर अस्पताल संचालन करने की अनुमति दी यह गहन जांच का विषय है इसी अस्पताल में दिनांक 14-5-21 को गोरव शर्मा पुत्र राजकुमार सुभाष नगर देहरादून का सी आर न०1363,आई पी डी न०1363,वार्ड आई सी यू,बैड न०4 के तीन डैथ सर्टिफीकेट बनाये जिसमे मृत्यु का कारण-
(१) कोविड़ पोजेटिव ए आर डी एस को काट कर
(२)कोविड़ पोजेटिव ए आर डी एस
(३) ए आर डी एस निमोनिया दर्शाये गए।
उपरोक्त डैथ सर्टिफीकेट अस्पताल की घोर लापरवाही,नियमो का उलंघन व आपदा को अवसर मान जनता से धन की खुली लूट दर्शाता है।
पारस दून अस्पताल की लापरवाही,दबंगता व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई अंकुश न होने के कारण एक विधवा माँ का आखरी सहारा भी छीन गया। गौरव शर्मा एक होनहार इंजीनियर था तथा शिमला में नोकरी करता था। ईलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूल युवक की माँ को आर्थिक रूप से भी तोड़ दिया गया जिससे आगे जीवन जीने व आर्थिक समस्या का कठोर सामना करने को भी विवश कर दिया गया।
पारस दून अस्पताल में गौरव शर्मा की मृत्यु नही मेडिकल हत्या हुई है। कहा जा रहा है की आई सी यू में गौरव बैड से गिरा उसके सर में चोट आई और कुछ समय मे ही उसकी मृत्यु हो गई परिजनों द्वारा आई सी यू की सी सी टीवी फुटेज माँगने पर परिजनों से अस्पताल स्टाफ ने झगड़ा किया व 14-5-21 की फुटेज नष्ट कर दी।

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ऑक्सीजन गैस ,आई सी यू बैड, वेंटीलेटर के नाम पर धोखा व लूट चरम पर प्रतीत होती है। उत्तराखंड में भी इलाज के नाम पर अस्पतालों की लूट जारी है। शैल शिखर सामाजिक संस्था के प्रबंधक अरुण कुमार शर्मा ने उत्तराखंड प्रदेश के मुख्यमंत्री,स्वास्थ्य मंत्री,पुलिस महानिर्देशक,महानिर्देशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण उत्तराखंड व मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून को पारस दून अस्पताल न्यू रोड देहरादून की शिकायत कर उचित कार्यवाही करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है की प्रदेश को एक पूर्णकालिक स्वतंत्र प्रभार स्वास्थ्य मंत्री नही मिल पाया है। प्रदेश के मुख्या ही स्वास्थ्य मंत्री व अन्य प्रमुख विभागों को कब्जाए बैठे है जिस पर उन विभागों के अधिकारियों पर भी कोई अंकुश नही व मुख्यमंत्री के अन्य कार्यो में व्यवस्था रहने के कारण उन विभागों को निरीक्षण भी उचित प्रकार से नही हो पाता। मुख्यमंत्री के सचिवालय व निवास पर शिकायती डाक रिसीव करने की भी कोई व्यवस्था नही इस लिए मुख्यमंत्री/स्वास्थ्य मंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायती पत्र प्रेषित किया गया।

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देश प्रदेश की आम जनता से स्वास्थ्य सेवाओ में लूट कब तक जारी रहेगी । बाज़ार व्यापार बन्द है लोगो के आय के साधन सीमित व समाप्त हो गए है महामारी एक्ट के नाम पर सिर्फ जनता के चालन हो रहे है जनता के ईलाज व सहायता गायब है। व निजी अस्पतालों व स्वास्थ्य सेवाओ पर कोई अंकुश नही । कोरोना जांच में भी फर्जीवाड़ा की खबरे नित समाचार पत्रों में छप रही है। शिकायत पत्र में सभी जिमेदार जन प्रतिनिधियों व अधिकारियों से आग्रह किया गया है की इस विषय की निष्पक्ष जांच कर दोषी अस्पताल पर कठोर कार्यवाही हो तथा एक माँ को न्याय दिया जाए।

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