
उत्तराखंड के लोगो सावधान डेंगू ने तो पहले ही रुला रखा है अब चमकी बुखार भी उत्तराखंड पहुच गया हरिद्वार के बुजुर्ग की हो गई एम्स में मौत।
क्या है चमकी बुखार पढ़े इसके लक्षण ओर सचेत रहे।

उत्तराखण्ड मैं डेंगू का डंक इस कदर कहर बरपा रहा है कि अब डेंगू पर विपक्ष मैं बैठी कांग्रेस शोर मचा रही है कि डेंगू से उत्तराखंड मे 50 से अधिक मोत हो गई है और 10 हज़ार से अधिक लोग डेंगू के मरीज है ।
जबकि उत्तराखण्ड के डीजी हेल्थ राजेश पांडये लगातार कह रहे है कि सही आंकड़े सिर्फ 1400 लोगो के ही है जिनमे डेंगू की पुष्टि हुई है जबकि मोत 4 लोगो की ।
लेकिन उससे हटकर बड़ी बात ये है कि उत्तराखंड मे बिहार के बाद अब चमकी बुखार यानी एक्यूट इंसेफेलाइटिस ने भी दस्तक दे दी है जानकारी अनुसार चमकी बुखार की वजह से हरिद्वार के एक बुजुर्ग की मौत हो गई दुःखद यह पूरी बात शुक्रवार को ऋषिकेश एम्स से आई रिपोर्ट के बाद पता लगी। चमकी बुखार की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग अब ओर सकते में है। बता दें कि डेंगू से पीड़ित हरिद्वार के एक मरीज ने गुरुवार को तड़के एम्स में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। 58 साल के इस बुजुर्ग मरीज को बुधवार को ही उपचार के लिए हरिद्वार से एम्स, ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। जो जानकारी मिली है उसके अनुसार मृतक काशीपुरा कोतवाली नगर क्षेत्र का रहने वाला है। मरीज के खून की जांच में डेंगू के लक्षण पाए गए थे। जांच के आधार पर स्वास्थ विभाग भी इसे डेंगू से मौत ही मान रह था। वहीं यह भी कहा जा रहा था कि मरीज की मौत वायरल से हुई है जबकि रिपोर्ट में साफ आया था कि वे डेंगू से पीड़ित थे। वहीं सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि शुक्रवार को एम्स से उनकी जांचों की रिपोर्ट ली गई है। रिपोर्ट के अध्ययन से पता चला है कि वे डेंगू से पीड़ित नहीं थे, बल्कि चमकी बुखार से हुई है।
आइये आपको बता दे कि चमकी बुखार के लक्षण और बचाव के क्या तरीके है
चमकी बुखार में बच्चे को लगातार तेज बुखार रहता है। बदन में ऐंठन होती है। बच्चे दांत पर दांत चढ़ाए रहते हैं। कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है। यहां तक कि शरीर भी सुन्न हो जाता है। इससे उसे झटके लगने लगते हैं। इसकी वजह से सेंट्रल नर्वस सिस्टम खराब हो जाता है।
जानिए क्या करें ओर क्या न करें।
बच्चे को बेहोशी की हालत में छायादार स्थान पर लेटाकर रखें।
बुखार आने पर बच्चे को दाएं या बाएं तरफ लेटाकर अस्पताल ले जाएं।
बुखार आने पर बच्चे के शरीर से कपड़े उतारकर उसे हल्के कपड़े पहनाएं।
ये आप बिलकुल भी न करें
बच्चे को कंबल से न ढकें या गर्म कपड़े न पहनाएं।
मरीज के पास बैठकर शोर न मचाएं।
बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में कुछ न डालें।
मरीज के बिस्तर पर न बैठें और न उसे बेवजह तंग करें।





