
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का दखल राज्य की रजनीति से तब तक रहना है जब तक वो राजनीति मे है भले ही उनको उनकी पार्टी के हाईकमान ने बड़ी जिम्मेदारी दी हो पर राज्य की हर गति विधियों पर उनकी नज़र दिल्ली से भी रहती है और जब हरीश रावत उत्तराखंड़ मे हो तो भला कैसे हो सकता है कि वो त्रिवेन्द्र की सरकार को ना घेरे इस बार हरीश रावत ने त्रिवेन्द्र सरकार से
राज्य की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है हरीश रावत ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार बीते दिनों उधमसिंह नगर जिले के किच्छा में पूर्व सीएम हरीश रावत ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से श्वेत पत्र जारी करने को कहा है
जिससे प्रदेश की जनता को उत्तराखण्ड की माली हालत की वास्तविकता पता लगे कि आखिर डबल इंजन की सरकार होने के बाबजूद प्रदेश सरकार को कर्ज किन परिस्थितियों में लेना पड़ रहा है। 
आपको बता दे कि कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता के दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा आपदा प्रबंधन में ये पूरी विफल सरकार है ओर मुखिया इस समय प्रदेश वासियों को संकट में छोड़ कर इन्वेस्टर मीट की तैयारी में लगे हैं, लेकिन वह ये तो बताए जिन उद्योगपतियों को वो न्योता दे रहे है, उसके लिए भूमि कहा है। जो भूमि है उसका प्रयोग पूर्व में निर्धारित हो चुका है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने पंतनगर की उपजाऊ भूमि में सेंध लगाने का प्रयास किया, तो इसका वह पुरजोर विरोध करेंगे। गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए पूर्व सीएम ने कहा किसान परेशान है और केंद्र सरकार आय दोगुनी करने की बात कर रही है। वही खरीफ़ की फसल के निर्धारित दाम सरकार की मंशा स्वयं बता रहे है। मात्र 30 रुपये की वृद्धि किसान के साथ मजाक है। कांग्रेस किसान को उसका हक दिलाने के लिए सड़क पर उतरने से पीछे नहीं रहने वाली है।
गन्ना किसान के साथ ही सितारगंज चीनी मिल को चलाना उनकी संकल्पबद्धता है।। बहराल हरीश रावत ने त्रिवेन्द्र रावत पर एक बाद एक सवाल खड़े कर दिए है उनकी माने तो त्रिवेन्द्र रावत को पहले पहाड़ की जनंता के दुख दर्द को देखना चाइए आये दिन पहाड़ मे सड़क हादसे हो रहे है। पूरी पहाड़ की सड़कें खत्म ही चुकी है,
राज्य के मुख्यमंत्री का प्रयास है कि राज्य के अंदर उधोग आये तो हरीश रावत के आने तर्क कुछ और है फिलहाल समय का इंतज़ार करना होगा ये देखने के लिए की कितने उधोग राज्य मे तीन साल मे लगते है कितनो को रोजगार मिलता है कितने उधोग पहाड़ पर लगते है और कहा कहा पर लगते है। राजनीति अपनी जगह हो सकती है पर विकास पर भारी ना पडे किसी की भी





