
ये वो नाम है जो बचपन से लेकर जवानी तक ओर जवानी से लेकर आज अपने बुढ़ापे तक लड़ता आ रहा है और आगे भी लड़ेगा इस योद्धा की लड़ाई खुद से है और ये भी नही कह सकते कि ये योद्धा कभी जीत ही ना ही कही बार विजय हुवा तो कही बार हारा भी पर जितनी बार जीता स्याद तब अपने मुताबिक कुछ कर पाए या नही ये अलग बात पर हार कर दोबारा खड़ा होना और हर हार से कुछ सीखना इस योद्धा को सबसे अलग रखती है जी हा हम बात कर रहे है राज्य के पूर्व मुख्य्मंत्री हरीश रावत की जो अपनी हार के बाद भी हार मानने को तैयार नही जो फिर 2019 के चुनाव मे एक बार फिर अपनी किस्मत अजमाने जा रहे है और सही भी है
क्योंकि हर हार से कुछ ना कुछ तो इन्होंने सीखा ही होगा वैसे जब से हर दा ये एलान कर चुके है कि अगर उनके कमांडर राहुल गांधी आदेश देगे तो वे चुनाव के मैदान मे उत्तर जायगे फिर भले ही इस योद्धा को 2019 अपनी गर्दन ही क्यो ना कटवानी पड़े पर ये योद्धा लड़ेगा ओर खूब लड़ेगा बस ये जानकर ओर सुनकर विपक्ष उतना बेचन नही जितना इनके परिवार के मतलब काग्रेस के वो नेता बौखला गए है जो इनके आज सुभचिंतक नही ओर वो तो ये भी चाहते है कि हरीश रावत को कग्रेस के युवराज़ राहुल घास भी ना डाले अभी से उन्होंने योजना बनानी आरभ कर दी है तब ही तो स्याद हरीश रावत ये सब जानकर अपने फेसबुक वॉल पर लिखते है कि अगर राहुल जी का आदेश होगा तो वे 2019 के चुनावी मैदान मे उत्तरगे ओर फिर चाहें उनका सर ही ना कट जाए वो काग्रेस को जीत दिलाने का हर सभव प्रयास करेगे हरीश रावत की फेसबूक् वाल पर की गई पोस्ट बहुत कुछ बया करती है।।
पहले ये की अब राज्य के उनके विरोधी काग्रेस के कुछ चुनिदा लोग नही चाहते कि हरीश रावत आगे भी राजनीति मे सक्रिय रहे दूसरी बात ये है कि हरीश रावत के चुनावी मैदान मे उतरने से बीजेपी को अब हरीश रावत के लिए अलग से योजना बनानी पड़ेगी क्योकि अब ना ही 2014 है और ना ही 2017 तिसरी बात ये है कि राज्य की जनता 2017 के बाद राज्य की सरकार को भी देख रही हैं और हरीश रावत के राजनीतिक दुश्मनों को भी ओर हरीश रावत को भी लिहाज इन तीनो मे हरीश रावत का ही पलड़ा भारी है और चौथी बात ये है कि हरीश रावत के प्रति जनता में भावनाएं आज भी बरकारर है ओर सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि इस 2019 के लोकसभा चुनाव के महापर्व मे राहुल गाधी के लिए एक एक सीट महत्वपूर्ण है और उन्हें उस सीट पर जीत चाइए ओर वो दाव उसी पर खेलेंगे जो उन्हें सीट निकालकर दे और इन सब बातों के बीच हरीश रावत मे अभी पूरा दम है चुनावी मैदान मे उतने का भी ओर सीट निकालकर देने का भी अब कारण जानिए अगर हरीश रावत हरिद्वार लोकसभा सीट से मैदान मे उतरते है ओर इस सीट पर सपा और बसपा किसी को टिकट ना देकर हरीश रावत को समर्थन दे मतलब काग्रेस को तो राजनीतिक समीकरण ये कहती है कि फिर इस सीट पर हरीश रावत का पलड़ा भारी रहेगा और दूसरी बात हरिद्वार की जनता की भावनाएं अभी हरीश रावत के साथ है उनके परिवार के साथ बनी हुई है ओर यदि हरीश रावत नैनीताल सीट से ताल ठोकते है तो यहा भी पहाड़ की जनता उनके ओर कग्रेस के साथ दिखाई देगा क्योकि अब बीजेपी से भगत दा यहा से चुनाव नही लड़ने का मन बना चुके है ऐसे मे भगत दा को छोड़कर हरीश रावत पर भारी पड़ने के लिए किसी मजूबत फेस की जरूरत बीजपी को होगी जिसका फायदा राजनीति मे हरीश रावत उठाना जानते है बस अब देखना ये होगा कि हरीश रावत कहा से चुनावी। मैदान मे उतरने का मन बनाते है और राहुल का आदेश कहा से मिलता है पर उससे बडी बात अभी फिलहाल ये है कि 2017 के चुनाव से पहले भी काग्रेस के सगठन ओर उस दौरान सरकार में एकता ना के बराबर थीं ओर आज अगर बात करे विपक्ष मे बैठी काग्रेस की तो आज भी यही हाल है कोई हरीश रावत गुट के नाम से जाना जा रहा है तो कोई प्रीतम सिंह गुट के नाम से ओर इन दोनों गुटों के पीछे वही लोग जी हुजूरी करते दिखाई देते है जिनका सिर्फ अपना स्वार्थ है उनकी माने तो बस वो लोग जिनके पीछे है उसके पास पावर होनी चाइए ओर जब तक यही चलता रहेगा तो काग्रेस लोकसभा क्या निकाय चुनाव मे भी ठीक परिणाम नही दे पाएगी क्योकि जब तक काग्रेस के ये नेता आपस मे फुटबॉल खेल कर एक दूसरे पर ही गोल मारते रहेगे तब तक इनका कुछ नही होने वाला स्याद काग्रेस के कमांडर राहुल। कोई रास्ता जल्द निकाले वरना बीजेपी को कुछ करने की जरूरत नही ये खुद ही आपस मे एक दूसरे को हरवाकर काग्रेस को कमजोर कर देंगे ओर बीजेपी का काम यूही बन जाएगा बहराल हरीश रावत की फेसबूक् वाल से तो यही मालूम चलता है कि हरीश रावत ने अभी हार नही मानी है और वो एक बार फिर जनता के पास जाकर अपने लिए वोट मागते दिखाई देंगे बाकी उससे पहले फैसला राहुल को करना है टिकट को लेकर ओर सबसे बड़ा फैसला उसके बाद जनता करेगी




