
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे जी चाहे कितने भी प्रयास आप कर ले पर ये निजी स्कूल वाले किसी ना किसी बहाने पाहड़ से लेकर मैदान के अभिभावको का खून चुसना नही छोड़ रहे है ।इस बढ़ती महंगाई मे आम जनता की खून पसीने की कमाई को पूरी तरह निचोड़ने मे लगे है
आपको बता दे कि राज्य के शासनादेश का भी प्राइवेट स्कूलों पर नहीं पड़ा रहा है कोई असर ओर निजी स्कूल वाले री-एडमिशन फीस की मोटी फीस वसूल कर रहे है ये ख़बर उत्तरकाशी से आई है और ये हालात तब है जब राज्य सरकार के शासनादेश के बावजूद प्रदेश में लगातार प्राइवेट स्कूल वाले री-एडमिशन फीस ले रहे हैं
. जिस कारण अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है ।उनको मजबूर किया जा रहा है बहुत से अभिभावकों ने बताया कि स्कूल री-एडमिशन फीस को अन्य नामों से उनसे लेता है ओर ना देने पर कुछ बात बोलने पर धमकी तक देते है क्योकि सवाल बच्चो के भविष्य का है इसलिये बहुत से लोग चुप हो जाते है तो कुछ अपने दिल का दर्द बयां कर देते है यही नही ये निजी स्कूल वाले तो अब पढ़ने वाले बच्चों पर दबाव डालाते है।
उत्तरकाशी जिले के कुछ प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से री-एडमिशन के नाम पर जमकर उगाही कर रहे हैं. लेकिन अपने बच्चे के भविष्य को देखते हुए कोई भी अभिभावक सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। हालांकि अभिभावकों ने बताया कि इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी बताया गया है. लेकिन बावजूद इसके विभाग चुप्पी साधे हुए है.

एक अभिभावक ने बताया कि उनके बच्चे से मैनुअल फीस लाने को कहा गया था, जो कि 5 हजार रुपये थी. अगर बच्चे समय से इस प्रकार की फीस जमा नहीं करवा पाते तो बच्चों पर अलग-अलग तरह से दबाव बनाया जाता है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों के संचालकों की बैठकें भी ली हैं, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला.
आपको बता दें कि राज्य सरकार ने 27 अप्रैल 2017 को शासनादेश जारी कर प्रदेश में स्थित सीबीएसई और आइसीएसई नई दिल्ली के अलावा राज्य बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में री-एडमिशन फीस पर रोक लगा दी थी. शासनादेश में कहा गया था कि विद्यार्थी को एक बार विद्यालय में प्रवेश देने के बाद अगली कक्षा में री-एडमिशन के नाम पर प्रवेश शुल्क न वसूला जाए। 
बहराल बोलता है उत्तराखंड की राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय जी ये निजी स्कूल वाले आपको अभी तक ठीक से समझ नही पाए है जिसका कारण है शिक्षा विभाग के कुछ ऐसे अधिकारी जिनकी साठ गांठ इन निजी स्कूल वालो से हो रखी है ओर ये कुछ अधिकारी ही निजी स्कूल वालो को कहते होंगे कि आप अपना काम करते रहिए मन्त्री का क्या है दो चार दिन बोलेगे फिर शांत हो हो जायेगे ओर अब तो सिर्फ तीन साल ही है फिर कोई ओर होगा मंत्री हमारे विभाग कहा आप हमें खुश करते रहो और हम खाँमोश रहेगे । बस हम भी मंत्री जी ओर अपने बड़े अधिकारियों को सिर्फ हा जी हा जी बोलते रहेगे ओर हमारा कुछ नही होता तबादले के सिवा । सरकार ओर मन्त्री तो आते जाते रहते है लेकिन आपको बचाने का काम हमारा ही है। कुछ समझे मंत्री जी अब आप पता लगाएं अपने उन अधिकारी कर्मचारी का। जो आपकी लगन मेहनत और निष्ठा के साथ पर्दे के पीछे खिलवाड़ कर रहे है क्योकि मे आपको साफ और कड़वी बात कह दू की ये वो शिक्षा विभाग है जो पिछले 17 सालो से मनमौजी रहा है और ये इतनी जल्दी ओर इतनी आसानी से नही सुधरने वाला । जिसके लिए आपको अब दबंग कम बल्कि कूटनीति के तहत यहा पर काम करना होगा क्योंकि आपके दबंग रूप मे तो सिर्फ फटकार ही इन को लग सकती है लेकिन अगर कूटनीतिक रूप से इस विभाग मे काम किया जाए तो नाकारे अधिकारी, कर्मचारी रास्ते पर खुद ही आ जायेगे ओर जब शिक्षा महकमे से जुड़े सभी लोग ठीक ठाक हो जाये तो बोलता उत्तराखंड समझता है कि फिर क्या निजी स्कूल वाले ओर क्या कुछ सरकारी स्कूल के टीचर सब लाइन पर आजाये । मंन्त्री पांडये जी अब आपके पास ठीक ठाक काम करने के लिए इस विभाग मे सिर्फ 30 महीने ही है इसलिए सुभकामनाये आपको इस बात के लिए की इस राज्य के सबसे बेकार महकमे को आप 50 प्रतिशत भी पटरी पर ला पाए तो ये बहुत बड़ा योगदान आपका होगा। क्योकि हमने देखा है पिछले सालों मे हर बार राज्य के पुराने शिक्षा मंत्रियो को चुनाव हारते हुए और आप से चाहते है कि आप इस रिकॉर्ड को बनाने की जगह तोड़ेते नज़र आये अगली बार दोबारा विधानसभा पहुचे अब ये सब आपके निर्णय के ऊपर है ।





