
ख़बर है कि उत्तराखंड के सीमांत जिलों में जेसे उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के एलटी-प्रवक्ता कैडर के शिक्षकों की इस साल तबादले की उम्मीद अब खत्म हो गई। जानकार कहते है कि
तबादला ऐक्ट के तहत गठित मुख्य सचिव समिति की संस्तुति के आधार पर शिक्षा सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम ने इसके आदेश कर दिए
बता दे कि तबादलों पर विवाद होने पर शिक्षा सचिव ने तीन जुलाई को सीमांत जिलों के शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगा दी थी। शिक्षा सचिव ने ताजा आदेश में कहा कि सीमांत जिलों के एलटी और प्रवक्ता कैडर शिक्षकों को यथावत बनाए रखने का निर्णय किया गया है। प्रतिस्थानी मिलने पर ही ओर उन्हें रिलीव किया जा सकता है। ख़बर है कि इस सत्र में सरकार ने तबादले की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है। ऐसे में प्रतिस्थानी मिलना मुमकिन ही नहीं है। इसके साथ ही सचिव ने गंभीर बीमारी से पीड़ित सात शिक्षकों के तबादले के आदेश भी कर दिए। साथ ही शून्य छात्र संख्या की वजह से हरिद्वार में भगवानपुर स्थित कीमपुरतुर्रा जीजीआईसी की प्रधानाचार्य अरुणा बलूनी का तबादला बुग्गावाला जीजीआईसी कर दिया गया है।
वही
राजकीय शिक्षक संघ ने सीमांत जिलों में तबादलों पर लगाई गई रोक को तत्काल हटाने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी ने कहा कि तबादला ऐक्ट में कहीं ऐसा नियम नहीं है कि सीमांत जिलों में तबादले न किए। दुर्गम क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं। ऐक्ट बनने से उनमें भी तबादले की उम्मीद बंधी थी। लेकिन जिस प्रकार तबादले रोक दिए गए, उससे शिक्षकों में घोर निराशा है। जिस प्रकार सरकार अन्य प्रकरणों में मुख्य सचिव समिति के आधार पर समस्याओं का हल निकाल रही है। उसी प्रकार सीमांत जिलें के शिक्षकों के तबादलों का भी समाधाना निकाला जाना चाहिए। इसके साथ ही पारस्परिक और अंतरमंडलीय तबादले भी किए जाने जाहिए। चूंकि इसमें विषयवार परस्पर तबादले होने हैं, इससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होती।
बहराल सूत्र बोलते है कि राज्य को शिक्षा महकमे के अफसर
शिक्षा मंत्री को भी लगातार गुमराह करने का काम कर रहे है जिस वजह से टीचर ओर मंत्री जी के बीच खटपट पैदा हो रही है।





