पीएम मोदी जी: उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री से सवाल बनता है कोरोना संबंधित सामग्री की बर्बादी का गंभीर आरोप क्यो लगा ? पूरा वीडियो जनता आप भी देखे


पीएम मोदी जी उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री से सवाल बनता है कोरोना संबंधित सामग्री की बर्बादी का गंभीर आरोप क्यो लगा पूरा वीडियो जनता आप भी देखे

देहरादून:

 

उत्तराखण्ड कांग्रेस कमेटी की गढ़वाल मंडल मीडिया प्रभारी एवं प्रदेश प्रवक्ता गरिमा महरा दसौनी और प्रवक्ता दीप बोहरा ने बुधवार को धामी सरकार पर कोरोना संबंधित सामग्री की बर्बादी का गंभीर आरोप लगाया।
राज्य के केन्द्रीय औषधीय भंडारण गृह चंदन नगर से सोशल मीडिया पर सीधा प्रसारण करते हुए कांग्रेस के दोनों प्रवक्ताओं नें भाजपा की करनी को उजागर करते हुए बड़ा खुलासा किया है।
दसौनी ने कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया की करोड़ों की लागत के फ्रीज, इंजेक्शन, दवाएं, आक्सीजन सिंलेडर इत्यादि भरी बरसात में सरकार की निष्क्रियता, निठल्लेपन और निकम्मेपन के चलते बरबाद होने को छोड़ दिए गए हैं।

दसौनी नें राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा ही कहा जा सकता है कि उत्तराखण्ड, जहां दूसरी लहर में हजारों की संख्या में मौतें हुई और राज्य का कोई परिवार ऐसा नहीं बचा जो सरकार की अव्यवस्थाओं का शिकार ना बना हो। ऐसे में आज संसाधनों की जिस स्तर पर बर्बादी भंडारण गृह में देखने को मिली है, वह अपने आप में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

दसौनी नें कहा की इसे विडंबना ही कहा जा सकता है कि राज्य की जनता जहां एक ओर दवा-इंजेक्शन, आक्सीजन, वेंटीलेटर के लिए दर-दर भटकी हो और बहुत ही मंहगे दामों में स्वास्थ्य से जुड़े हुए इन उपकरणों को बाजार से खरीदने के लिए मजबूर हुई हो आज उसकी आंखों के सामने लाखों-करोड़ों की दवाई और फ्रीज सरकार की उदासीनता की वजह से बर्बाद हो रहे हैं।
दसौनी ने बताया की चंदन नगर में 90 हजार की लागत वाले 150 फ्रीज खुली बरसात में जंक खा रहे हैं। वहीं हजारों की तादाद में आक्सीजन सिलेंडर काई और कीचड़ की भेंट चढ़े हुए हैं। दूसरी ओर छोटे आक्सीजन सिलेंडर की पेटियाँ, दवाईयों व इंजेक्शन की पेटियाँ बरसात सीजन में सामान सहित सड़ने-गलने के लिए प्रशासन द्वारा छोड़ दी गयी हैं।
दसौनी ने कहा की पहले साढ़े चार साल तक उत्तराखण्ड की जनता स्वास्थ्य मंत्री से महरूम रही फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कोरोना जैसी आपदा के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन की भेंट चढ़ गयी जिससे उत्तराखण्ड को भारी जान-माल का नुकसान हुआ। उसके बाद भी यदि सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों के प्रति यह रवैया है तो फिर कोरोना की तीसरी लहर से आखिर जंग कैसे लड़ी जायेगी क्या एक बार फिर जनता को खुद के भरोसे छोड़ने का सरकार मन बना चुकी है

 

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