
उत्तराखंड में जारी है कुदरत का कहर: 5 जिंदगियां की जान मलबे ले डाली

आपको बता दे कि
उत्तराखंड में दो दिन से हो रही बारिश ने गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक जमकर कहर बरपाया। सोमवार को कोटद्वार के जयहरीखाल में मलबा आने से मां-बेटी समेत तीन की मौत हो गई तो वहीं, चंपावत में मलबे की चपेट में आने से मां-बेटे ने जान गंवा दी। सोमवार दोपहर लैंसडौन तहसील में गूमखाल और जयहरीखाल के बीच स्थित समखाल में भारी बारिश मजदूर परिवारों के लिए काल बनकर आई है। अचानक पहाड़ से गिरे मलबे में एक टेंट के दबने से मां-बेटी समेत तीन की मौत हो गई। दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं। दोनों को जयहरीखाल में प्राथमिक उपचार के बाद कोटद्वार बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है
मलबे में दबने से दो महिलाएं समूना (50) पत्नी नियाज, सपना (40) पत्नी लिंगडा और सपना की चार साल की बेटी अलीसा की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में पिता नियाज (56) और बेटी साबिया (16) गंभीर रूप से घायल हो गए।
कोतवाल ने बताया कि सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। घायलों को जयहरीखाल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उन्हें हायर सेंटर बेेस अस्पताल कोटद्वार के लिए रेफर किया गया।
उधर, चंपावत में मूसलाधार बारिश ने दो जिंदगियां लील ली। नगर से चार किलोमीटर दूर सेलाखोला के रोपा में मकान में घुसे मलबे में दबने से मां-बेटे की मौत हो गई। दरवाजा तोड़कर मलबे से शव निकालने में राहत टीम को तीन घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी। शाम को मां-बेटे का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। वारदात के वक्त घर पर नहीं होने से परिवार के मुखिया की जिंदगी बच गई। तहसीलदार ज्योति धपवाल ने बताया कि सेलाखोला के रोपा के आवासीय क्षेत्र में सोमवार करीब 12 बजे आनंद सिंह मौनी के मकान में भारी मात्रा में मलबा घुस गया।
मकान के दरवाजे को तोड़ तीन घंटे की मशक्कत के बाद मलबे से राहुल का शव बाहर निकाला जा सका। इससे पहले 45 मिनट की मशक्कत के बाद रसोई से कलावती का शव निकाला गया। पंचनामा भरने के बाद डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंपा। वारदात के बाद से परिवार में मातम छाया है। डीएम विनीत तोमर ने बताया कि मृतकों के परिजनों को अहेतुक राशि के अलावा चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
इंटर में पढ़ने वाले 17 साल के राहुल सिंह मौनी को शायद मौत बुला रही थी। नवरात्र के लिए राहुल अपने पैतृक गांव पाटी के मौनकांडा गया था और 18 अक्तूबर से पढ़ाई के लिए रविवार को ही लौट कर आया था। भारी बारिश के चलते सोमवार को स्कूल बंद थे। राहुल घर में पढ़ाई कर रहा था कि तभी एक झटके से आए मलबे ने उनकी जिंदगी छीन ली। राहुल ने मौत से बमुश्किल चार घंटे पहले फेसबुक पोस्ट भी डाली थी। वह पढ़ाई में काफी तेज था। कमजोर माली हालत होने पर भी वह काम के साथ पढ़ाई को लेकर खासा संजीदा था। लेकिन उसके भविष्य के सपने मलबे में दफन हो गए।
आसपास के लोग बताते हैं कि राहुल की मां कलावती देवी ने मौत से 15 मिनट पहले बेटी को फोन पर मलबा गिरने की सूचना दी थी। कलावती को भी इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि मामूली दिखने वाला यही मलबा कुछ देर में उसकी जिंदगी पर भारी पड़ेगा। परिवार के मुखिया आनंद सिंह मौनी दूध देने शहर गया था और बारिश तेज होने से वह कुछ देर रुक गया। बाद में पड़ोसियों ने फोन कर उसे मलबा आने की जानकारी दी लेकिन उसके घर पहुंचने से पहले उसकी दुनिया लुट चुकी थी। आनंद पत्नी और बेटे की मौत से भारी सदमे में हैं।




