मुख्यमंत्री धामी जी आप से बेहतर कोन समझ सकता इनका दर्द, क्या इनकी क़िस्मत में मरते दम तक आंदोलन ही लिखा है ??

10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण की मांग पूरी न होने से देहरादून में गुस्साए राज्य आंदोलनकारियों ने राजभवन कूच कर कल जमकर प्रदर्शन किया।

राजभवन से पहले पुलिस ने बैरियर लगा आंदोलनकारियों को रोका तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर नोकझोंक भी हुई। इसके बाद आंदोलनकारी सड़क पर बैठ गए और धरना-प्रदर्शन किया।

बुधवार को उत्तराखंड राज्य आंदोलकारी मंच के बैनर तले आंदोलनकारी बहल चौक पर एकत्र हुए। यहां से नारेबाजी करते हुए आंदोलनकारी राजभवन कूच करने के लिए बढ़े। पुलिस ने हाथीबड़कला के पास बैरिकेडिंग लगा उन्हें रोक दिया।

आंदोलनकारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2015 में गैरसैंण विधानसभा सत्र में 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण विधेयक को मंजूरी दी गई थी और अग्रिम कार्यवाही के लिए राज्यपाल को भेजा था, लेकिन छह साल बाद भी इस संबंध में राज्यपाल की ओर से कोई कार्यवाई नहीं की गई।

इससे आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों ने कहा कि 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण विधेयक राजभवन में लंबित होने से कई राज्य आंदोलनकारियों को नौकरी से वंचित होना पड़ रहा है। 

इतना ही नहीं पूर्व में विभिन्न सरकारी सेवा में आरक्षण के तहत परीक्षा पास करने वाले राज्य आंदोलनकारी भी नौकरी की अपेक्षा में दर-दर भटक रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में जगमोहन सिंह नेगी, धीरेंद्र प्रताप, रविंद्र जुगरान, वीरेंद्र पोखरियाल, विजय प्रसाद मल्ल, जयदीप सकलानी, अजय राणा, भुवनेश्वरी नेगी, प्रमिला रावत, शकुंतला रावत, सुलोचना भट्ट समेत सैकड़ों आंदोलनकारी मौजूद रहे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण न मिलने के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के हित में जो भी कदम उठाए गए, वह कांग्रेस सरकार ने उठाए थे।
भविष्य में भी कांग्रेस की सरकार आने पर राज्य आंदोलनकारियों के सपनों और आकांक्षाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी से लेकर आंदोलनकारियों के हित में तमाम कदम उठाए जाएंगे। 

उन्होंने कहा कि 2015 में आंदोलनकारियों को आरक्षण का विधेयक गैरसैंण विधानसभा सत्र में पास किया गया था, उस वक्त वे राज्य के गृहमंत्री थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में विधानसभा में सर्वसम्मति से 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का बिल पास हुआ था लेकिन बड़े खेद का विषय है कि डबल डीजल इंजन की सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के सपने पर डाका डाल दिया

10 प्रतिशत आरक्षण पर राज्य सरकार की कैबिनेट और विधानसभा का प्रस्ताव पिछले पांच सालों से राजभवन में लंबित पड़ा है। उन्होंने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से अपील की कि वह राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र इस विधेयक पर मुहर लगाकर राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण का लाभ दें। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here