आखिर क्यों लगता है ऐसा कि सेवानिवृत्त कार्मिक सदैव दूसरे की गाय से गोदान करने की चेष्ठा मे रहते हैं ओर क्या है सरासर झूठ है जरा पढ़िये इस ख़बर को

आखिर क्यों लगता है ऐसा कि सेवानिवृत्त कार्मिक सदैव दूसरे की गाय से गोदान करने की चेष्ठा मे रहते हैं ओर क्या है सरासर झूठ है जरा पढ़िये
उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति

पहले जरा इस पत्र को पढ़िये 

इस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार
समन्वय मंच के साथ स्व0 प्रकाश पन्त के साथ समझौते के बिन्दुओ को क्रियान्वित कराने की मांग की बात की गयी है,
कार्मिको के हितो पर संगठनो के स्तर से सरकार से बात करना और मनवाना अच्छी बात है, परन्तु सही बातो को भी सबके सामने वास्तविकता के साथ रखना यह भी आवश्यक है।
जिन बिन्दुओ पर स्व0 प्रकाश पन्त जी के साथ हुये समझौते की बात यहा पर की जा रही है, वो सरासर झूठ है।
यह समझौता दिनांक 31.01.2019 को उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच के साथ न होकर उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति के साथ सम्पन्न हुआ था, जिसमे संयोजक मंडल के रूप मे सचिवालय संघ द्वारा प्रमुख भूमिका निभाई गयी थी,
जबकि इस समन्वय समिति के अन्य संयोजको मे से अधिकांश संयोजक सेवानिवृत्त हो चुके हैं तथा कई संयोजक राजनैतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं, इस प्रकार से समन्वय समिति के साथ हुये समझौते को समन्वय मंच के साथ हुआ बताना भ्रामक है। सेवा संघो की मान्यता नियमावली के अन्तर्गत कोई भी सेवानिवृत्त कार्मिक किसी भी सेवा संघ मे पदाधिकारी नही रह सकता, ऐसी स्थिति मे ऐसे सेवा संघो की मान्यता रद्द किये जाने का नियम कार्मिक विभाग से निर्गत है, ऐसे सेवा संघो मे काबिज पदाधिकारियो द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद दिये जाने वाले बयान की क्या महत्ता एवं विधिक दृष्टिकोण से कितना सही है, इसका आकलन भी सभी को करना चाहिये। कार्मिक विभाग को ऐसे संघो का भी संज्ञान लेना चाहिए, जिसमे पदाधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद भी काबिज हैं। मामले को देखकर ऐसा लगता है कि विभिन्न सेवा संघो मे काबिज सेवानिवृत्त कार्मिक सदैव दूसरे की गाय से गोदान करने की चेष्ठा मे रहते हैं।
संयोजक
उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति 

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