बोले क्यो हरीश रावत : मैं उत्तराखंडी गंगलोड़” हूंँ मैं घिसते-2 मर सकता हूंँ मगर टूट नहीं सकता!

हरीश रावत कहते है कि 

#नाविक को डर नहीं है नदी के तूफान से
हाथ में सिर्फ पतवार होनी चाहिए”।
₹200 प्रति परिवार, प्रतिमाह गैस_सब्सिडी को लेकर मैं राज्य के लोगों से प्रार्थना करना चाहता हूंँ कि मुझ पर यकीन करें। मैंने रसोई_गैस की बढ़ती कीमतों से एक ग्रहणी की जो स्थिति बन जा रही है उससे चिंतित होकर के और सब पहलुओं पर विचार करके यह घोषणा की है, जिसमें आर्थिक पहलू भी है। यदि प्राकृतिक प्रकोप से तबाह हुये उत्तराखंड की तस्वीर को हरीश रावत अपने सहयोगियों के सहयोग से एक-डेढ़ साल में सवार सकता है तो ये वादे, जिनको पैसे के अभाव में कैसे पूरा किया जाएगा एक बड़ा सवाल है, मगर हम आर्थिक स्थिति को भी एक-डेढ़ साल में सवार करके वहां तक ले आएंगे, जहां से ये वादे बहुत सरल लगने लगेंगे।
“गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में”,
मैं अपने उन दोस्तों से कहना चाहता हूँ जो बार-बार अपने भाषण में मेरी चुनावी हारों की याद दिलाते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं किसी हार ने हरीश रावत का मनोबल नहीं तोड़ा, यहां तक कि जब केंद्र_सरकार मुझ पर बरस रही थी, सरकार को बर्खास्त कर रही थी तब भी मैं कह रहा था कि “मैं #उत्तराखंडी_गंगलोड़” हूंँ। मैं घिसते-2 मर सकता हूंँ मगर टूट नहीं सकता, उन्हें मेरी तरफ नहीं देखना चाहिए बल्कि अपने उन आदर्शों की तरफ देखें जिनके लिए उन्होंने दलबदल जैसा महापाप किया, वो आज कहां हैं! कितना लड़ रहे हैं! और भी भूत हैं वो कितना जनता से जुड़कर के, कंधे से कंधा मिलाकर के संघर्षशील लोगों के साथ खड़े हैं तो हरीश_रावत से यदि कुछ और नहीं सीख सकते तो राजनीति में कैसे संघर्ष करके भी आगे बढ़ा जा सकता है, इसको तो सीखना ही चाहिये।


#uttarakhand
Uttarakhand Congress

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