देहरादून

उत्तराखण्ड में 5 वी विधानसभा का चुनाव सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृव में भाजपा ने लड़ा

5 जुलाई को मुख्यमंत्री का काटो भरा ताज पहनकर चुनोतियों से घिरे पुष्कर सिंह धामी ने सबसे पहले राज्य के अंदर वे सभी महत्वपूर्ण फैसले लिए जिसकी वजह से भाजपा का वोट ग्राफ लगातार घट रहा था ओर जनता के बीच भाजपा सरकार की छवि खराब हो रखी थी , जैसे तैसे युवा धामी सबको साथ लेकर आगे बढ़ते जा रहे थे
मुख्यमंत्री धामी का सरल स्वभाव , सादगी ,ओर हर किसी को भाई कहकर बात करना कार्यकर्ताओ को राज आ रहा था
कुल मिलाकर उत्तराखण्ड के अंदर इससे पहले अकड़ू, ओर अहंकारी मुख्यमंत्री की छवि बनी हुई थी उसे मुख्यमंत्री धामी ने बड़ी सरलता से अपने मुख्यमंत्री बनने के महज 30 दिन के भीतर ही पलट दिया था
अब धामी के बढ़ते कदम ओर पीएम मोदी के मिलते साथ को देख कर विपक्ष जहा परेशान था वही धामी के कुनबे के लोग ही धामी के खिलाफ षड़यंत्र करने में जुट गए थे जो आज भी जुटे हुए है
कुल मिलाकर 6 महीने में धामी ने वे सभी महत्वपूर्ण फैसले लिए जिसकी उम्मीद डबल इंजन की सरकार से उत्तराखण्ड करता था
ओर 4 साल से नाराजगी के वेंटिलेटर पर पड़े कार्यकताओ को धामी के ही कुशल व्यवहार ने खड़ा कर फिर से भाजपा के लिए वोट मांगने के लिए चलता फिरता किया

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अब बारी चुनाव की थी और कब 6 महीने निकल गए पता ही नही चला
खैर इस काम को भी सिर्फ मुख्यमंत्री धामी ने अकेले ही मोर्चा संभालाते हुए ताबड़तोड़ उत्तराखण्ड की कुछ एक विधानसभाओ को छोड़ दिया जाए तो हर जगह स्वयं ताबड़तोड़ दौरे कर , जनसभाओं में भाजपा के उम्मीदवार के लिए वोट मागे , बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील की
तो वही दूसरी ओर राज्य के लगभग सभी कैबिनेट मंत्री अपने घरों में, अपनी विधानसभा से बाहर तक नही निकले
ओर एक तरफ युवा मुख्यमंत्री धामी थे कि वे अपनी कर्मभूमि खटीमा सीट की परवाह किए बगैर पूरे प्रदेश में तड़ातड़ धाकड़ प्रचार में जुटे थे
यदि कड़वा सच बताया जाए तो ना जाने किन किन लोगों को बुरा लगेगा पर सच यही है कि
मुख्यमंत्री धामी ही अबकी बार महज 20 सीटो पर सिमटने वाली भाजपा को पहले फाइट में लेकर आये फिर सत्ता के करीब ओर बाकी काम पीएम मोदी की ताबड़तोड़ रैलियों ने कर दिया बस अब परिणाम का इतजार है
लेकिन इस चुनाव में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भी विवादों में घिरे रहे एक तो वे अपनी सीट को छोड़कर चुनाव में कही नही जा सके और ना ही प्रदेश में भाजपा के उम्मीदवारों के लिए ना के बराबर वोट माग पाए , दूसरा उन पर भाजपा नेताओं ने ही कही ताबड़तोड़ आरोप लगा डाले जो आज भी जारी है
खैर विपक्ष हो या भाजपा के नेता या फिर धामी के राजनीतिक विरोधी सामने भले ही कुछ ना कहे पर आफ दा रिकॉर्ड इस बात को जरूर कह रहे हैं कि धामी ने भाजपा को उत्तराखण्ड में  डूबने से  बचा लिया

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