
डबल इज़न की सरकार जो काम विजय बहुगुणा ओर हरीश रावत नही कर पाए उस काम की उम्मीद आपकी सरकार से गाँव के लोगो ने लगाई है अब देखो ना 16 ,17 जून साल 2013 की आपदा के बाद भले ही आज केदारनाथ भगवान की यात्रा बहुत बढ़िया चल रही है पर अगर बात करे केदार घाटी के गाँव की ओर जोशीमठ की तो 2013 की आपदा को पांच साल से अधिक का समय होने के बाद भी पहाड़ वासियों को जो नुकसान हुवा आपदा के दौरान उसकी भरपाई आज तक ना हो पाई बोलता उत्तराखंड बता रहा है कि आज भी उर्गम, भर्की गांव मे आने जाने की कोई सुविधा नही है नेता तो कह रहे है सब ठीक हो गया पर तस्वीर उन सब नेताओ के दावों बता रही है कि अभी कुछ ठीक नही है राज्य मे मानसून भी समय से पहले आ चुका है
और उत्तराखंड मे मानसून की दस्तक आते ही खतरनाक तस्वीर सामने आती है राज्य सरकार ने भी पहाड़ो मे मानसून की दस्तक की तैयारियो के लिए अधिकारियों को कह तो दिया है उचित दिशा निर्देश भी दे दिए है पर गाँव वाले आज भी डर के साये में ज़िन्दगी जी रहे है वो लोग 5 साल बाद भी उस आपदा को नही भूले है 
आज भी हर रोज लोग बारिश होते ही डर कर राते गुजार रहे है ओर दिन मे अपनी रोज मरा के जीवन को यापन करने के लिए जान पर खेल रहे है उर्गम घाटी के लोगो का डबल इज़न की सरकार पर भरोसा था कि कुछ काम होगे और आपदा के हालातो मे सुधार होगा पर ये तस्वीर बया कर रही है कि सरकार किसी की भी बने पर हालात मे सुधार नहीं होने वाले आज भी इंसान बल्लियों के सहारे अपनी जान के साथ खेल रहा है दरसल दो दिन पहले जोशीमठ की उर्गम घाटी मे जमकर बारिश ने कहर भरपाया था जिसमें कल्प गंगा मे बना अस्थायी पुल बह गया ग्रामीणों ने आवाजाही के लिये बल्लियो का पुल बनाया जिसमे गुजरना और भी खतरनाक हो गया है। फिलहाल बोलता उत्तराखंड डबल इज़न की सरकार तक गाँव वालों के दर्द को रख रहा है याबी देखना यही है कि कब तक गाँव वालों की मुराद पूरी होती है उन्हें एक अच्छा और मज़बूत पुल मिल पाता है




