
देहरादून: पहाड़पुत्र बलूनी के प्रयासों से त्रिवेद्र राज का एक और फैसला पलट सकता है. मामला पौड़ी जिले के एक हजार गाँवों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित सिंगटाली मोटरपुल का है, जिसे डिजाईन और लोकेशन तय होने और वितीय मंजूरी मिलने के बाद निरस्त कर दिया गया. आंदोलित ग्रामीणों ने राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी से पिछले दिनों शिकायत की थी. इस मामले को लेकर बलूनी बेहद नाराज हैं. उन्होंने मुख्य सचिव ओमप्रकाश को पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर किन कारणों से प्रस्तावित मोटर पुल का आदेश निरस्त कर दिया गया. उनके पत्र पर मुख्य सचिव ने प्रमुख लोक निर्माण विभाग से रिपोर्ट मांग ली है.
आपको बता दें कि, पिछले दिनों बलूनी जब अपने पैतृक गाँव गये थे, उस दौरान देवप्रयाग में ग्रामीणों उनसे यह मसला उठाया था. उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि यदि मोटरपुल का बनाया जाना उचित होगा, तो वह बनकर रहेगा। इसके बाद उन्होंने सात अप्रेल को मुख्य सचिव को पत्र भेजकर पुल निरस्त करने की रिपोर्ट माँगी है. ऐसे में मोटर पुल के मामले में फैसला पलट सकता है.
गौरतलब है कि, सिंगटाली में मोटर पुल का प्रस्ताव 2006 में मंजूर हो गया था. इसके साथ पौड़ी जिले की ओर व्यास घाट से सिंगटाली तक मोटर मार्ग ढांगू गढ़ के पास तक बना दिया गया. लेकिन 2000 में मोटरपुल के निर्माण के आदेश को निरस्त कर दिया गया.
इससे पहले पूर्व आईएएस आधिकारी एसएस पांगती ने भी मोटर पुल के मामले में राज्यसभा सांसद से दिल्ली में शिकायत की थी. उन्होंने कहा कि मैंने सांसद बलूनी
को सभी साक्ष्य उपलब्ध करा दिए हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस मोटरपुल को स्वीकृत करने में वर्षों में लग गये. उसे एक एनजीओ के एतराज पर निरस्त कर दिया गया. अब नई लोकेशन पर ग्रामीण क्यों सालों का इन्तजार देखें। उन्होंने उम्मीद जाताई है कि, बलूनी पहाड़ हित में मोटर पुल का निर्माण करायेंगे।






