देहरादून में ही 60 दिन के अंदर कोरोना से 2500 से अधिक मौत !

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 तीरथ सरकार सवाल तो बनता है क्योकि अभी भी सबक लेने को तेयार नही है स्वास्थ्य महकमा

देहरादून में हर तरफ चीख पुकार जलती चिताएं , अंतिम संस्कार के लिए भी बुकिंग , हर आंख खूब है रोई , लाहपरवाह तंत्र, कागजो में व्यवस्था ओर हकीकत में वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य महकमा। ये देहरादून के लिए कहना गलत ना होगा। पिछले दो दिन में भले ही मैदान से थोड़ी राहत भरे आंकड़े सामने आ रहे हो। लेकिन कड़वा सच यही है कि कोरोना के तांडव में देहरादून खूब जला है, ओर आज भी जल रही है चिताएं तो बिलख रहे है ,मातम में है उनके परिजन।

अपने देहरादून जिले में मृतकों का आंकड़ा डराने वाला है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग पर सवालियां निशान खड़ा होता ही है। बता दे कि पिछले दो माह में उत्तराखंड में इस महामारी से 5034 लोग असमय ही काल का ग्रास बने हैं । चौकाने वाली बात ये है कि इनमें से आधे से अधिक यानि 2571 मौतें अकेले देहरादून जिले में ही हुई हैं। और अब इस कोरोना ने पहाड़ पर भी चढ़ना आरम्भ कर दिया है। जो पहाड़ के लिए ठीक नही।

विगत 15 मार्च से 17 मई के आंकड़ों पर नजर डालें तो सर्वाधिक मौत देहरादून जिले में ही हुई हैं । सामाजिक संस्था सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज फॉउंडेशन के मुखिया अनूप नौटियाल ने कोरोना को लेकर जारी होने वाले सरकारी बुलेटिनों की समीक्षा की है । अनूप बताते हैं कि सबसे ज्यादा मौतें देहरादून जिले में हुई हैं ।इस अवधि में सूबे में कुल 5038 लोगों की मौत इस महामारी से हुई है ।इसमें से 2571 मौतें अकेले देहरादून जिले में ही हुई है ।ये संख्या कुल मौत का लगभग 51 फीसदी है।

अनूप कहते हैं कि आंकड़े बता रहे हैं कि मौत के मामले में नैनीताल जिला दूसरे स्थान पर है । इस जिले में 17 मई तक 748 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है । इसी तरह हरिद्वार जिले में 532 , ऊधमसिंह नगर में 494 , पौड़ी में 228, अल्मोड़ा में 103
, पिथौरागढ़ में 85
, रुद्रप्रयाग में 58 ,
टिहरी में 55 ,
उत्तरकाशी में 50
, बागेश्वर में 43 ,
चमोली में 37
और चंपावत में 30 लोगों को कोरोना ने असमय ही मौत के मुंह में धकेल दिया है । अहम बात यह है कि राजधानी वाले जिले में इतनी मौतें चौंकाने वाली हैं । अन्य जनपदों की तुलना में इस जिले में सरकारी के साथ ही कई बेहतर सुविधाओं वाले निजी अस्पताल भी है । साथ ही तमाम आला अधिकारी भी इसी जिले में रहते हैं और काम करते हैं। इसके बाद भी देहरादून जिले में मौत का यह आकंड़ा हैरान करने वाला है ।

समाजसेवी अनूप ने अपने ट्वीट में एक सवाल और भी उठाया है । वे लिखते हैं कि यह भी सोचनीय है कि सरकारी अस्पताल मौत का आंकड़ा समय पर नहीं दे रहे हैं । ये प्रशासनिक सिस्टम के कोलेप्स होने का संकेत कर रहा है । इस दिशा में सरकार को गंभीरता से सोचना होगा । बहराल आज पीएम मोदी ने देहरादून के जिले अधिकारी से चर्चा की है और जिले अधिकारी ने अब तक के काम का ब्यौरा भी दिया है। अब देखना ये है कि आगे भी क्या लाहपरवाही होती दिखाई देगी। या कुछ सुधार दिखाई देगा।

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