
संजय पंचभैया की कलम से ….!
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ बस्ता न बणाओ।
कखी टैक्सी गाड़ी बेलगाम।
मनखी बखरा सी छनकेणा छन हे राम
कखी दुराचारी अपराधी बलवान।
बच्यां खुच्यां मनख्यूं सन निपटाणा छन।
कखी मनसाक बाग डराणू च।
भूखा लोगू खैकी भूख मिटाणू च।
फौजी फन्डा अपनाओ
खण्डुरी जनु डण्डा चलाओ
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ जनु बस्ता न बणाओ।
बेशर्मु तै शरम नी च
शर्मदार कु धरम नी च।
कवि गायक सैन्ट बणयां छन
उत्तरा जनु धमकयां छन।
ईं ताकत अपराधी पर दिखाओ।
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ जनु बस्ता न बणाओ।
पैली कज्यणी आधी रात मा
रोटठी बणैकी बोलदी छै।
उठा जी ड्यूटी टाइम पर जावा।
अबी तक बी गाड़ी टैक्सी वला बी चौंकणा छन।अगड़ी सीट पर अबी तक डण्डा लगयां छन।
कुछ त अपुणु धर्म निभाणा छन।
कुछ निमैस्या सी फोन्दया बण्यां छन।
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ जनु बस्ता न बणाओ।
सत्ता सन चसणी न बणाऔ।
कबी हरसू मामा, कबी तरसू मामा।
पांच साल मैन बणाई, पांच साल तुम बणाऔ।
खबरदार प्रधानौ जनु बस्ता न थमाऔ।
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ जनु बस्ता न बणाओ।
बोडी बीमार पोड़ीं च,
बोडा रोटठी थेपूणू च।
नौनू बेरोजगार रोणू च।
कबी नेता जी कू प्रचार,
कबी सोटा जी कू प्रचार।
लाटा की जीन्दगी मां झणी
कुजणी कब आली बहार।
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ जनु बस्ता न बणाओ।
हर बार जंगुऊ मा शेर नी गुरांदू।
फेर बी मनखी कौंप जान्दू।
हर बार हर जागा शेर मौजूद नी रांदू।
फेर बी अपुणु कानून याद दिलांदू।
खण्डूरी जनु राज चलाओ।
प्रधानौ जनु बस्ता न बणाओ।




