
देवभूमि की जनता के लिए ये ख़बर ठीक नही है । सख्त से सख्त कानून बन गए , दुष्कर्म जैसे अपराध करने पर बहुत सख्त कानून बनाया गया पर बेटियों के साथ अपराधों की संख्या कम नही हुई । अगर बात करे तो पिछले 5 सालों में देवभूमि की लगभंग 1779 बच्चियां दरिंदगी का शिकार हो गई।
हा एक बात जरूर हुई और वो है कि दुष्कर्म करने वालो को सज़ा जल्द मिलने लगी है आंकड़े बोलते है कि 5 सालो मै लगभंग 365 अपराधियों को कानून ने सजा दे कर उन्हें जेल की सलाखों तक पहुचाया ।
उतराखंड की आस्थाई राजधानी देहरादून में तो पिछले 12 महीनों में दुष्कर्म और हत्या जैसे अपराधों में तीन लोगों को फांसी तक की सजा सुनाई जा चुकी है।
आपको याद होगा कि साल था 2012 ओर तारीख थी 16 दिसंबर समय था रात का ओर जगह थी राजधानी दिल्ली की जहा निर्भया के साथ दरिंदों ने वो किया, जिससे पूरा देश सदमे में था। ओर फिर उस दुःखद घटना के बाद भारत की जनता सड़को पर थी इर यही वजह थी जब इस आक्रोश के बाद दरिंदों के खिलाफ सख्ती होती दुखाई दी ।
बस फिर क्या था पूरे भारत मे इसके बाद से दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाए जाने की बहस भी शुरू हो गई। नाबालिग बच्चियों को दरिंदगी का शिकार बनने वालों के खिलाफ पोेक्सो कानून बना और देश भर में फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन कर कड़ी सजा दिलाने का प्रावधान हुआ ।
पर अफसोस कहा ये जा रहा था कि अब इन अपराधों पर कमी आएगी लेकिन ये कहा गया पर हो ना पाया इसके बाद भी अपराध लगातार बढ़ने लगें ।
देवभूमि उत्त्तराखंड मे तो मानो जैसे महिला अपराधों की बाढ़ ही आ गई हो क्योंकि आंकड़े गवहा है । जो रिकार्ड मे दर्ज है ।
आपको बता दे कि साल 2013 मे 101 केस दर्ज हुए सजा 18 मामलों में मिली जबकि अभी 28 लंबित है ।
साल 2014 मे 304 केस दर्ज हुए सजा 31 मामलों में मिली जबकि अभी 58 लंबित है ।
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साल 2015 मे 290केस दर्ज हुए सजा 54 मामलों में मिली जबकि अभी 96 लंबित है ।
साल 2016 मे 338 केस दर्ज हुए सजा 93 मामलों में मिली जबकि अभी 372 लंबित है ।
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2017 मे 440 केस दर्ज हुए सजा 123 मामलों में मिली जबकि अभी 495 लंबित है ।
साल 2018 जून के महीने तक मे 306 केस दर्ज हुए सजा 47 मामलों में मिली जबकि अभी 520 लंबित है ।
यानी आप ये समझे कि पिछले 5 सालों में कुल 1779 केस दर्ज हुए और 366 को मिली जबकी अभी 1569 मामले लंबित है ।
बहराल इन बढ़ते अपराध को कम करने के लिए आपको हमको समाज को पुलिस प्रशासन की मदद करनी होगी।
लोगों को जागरूक करना होगा।
अपने नाबालिग बच्चों की अच्छे और बुरे मे फर्क समझना होगा। क्योंकि ये बढ़ते अपराध सिर्फ और सिर्फ आपकी जागरूकता से ही कम होगे बाकी कानून तो अपना काम कर ही रहा है ।






