
आंदोलन और हड़तालों से जन्मे राज्य को क्या मालूम था कि ये हड़ताल , धरने , आंदोलन आगे भी राज्य मे होते रहेंगे जो राज्य के विकास के लिए राज्य की तरकी के आगे सबसे बड़ा रोडा बनकर सामने आएंगे इन्हीं सब बातों के बाद से ही प्रदेश को हड़ताली प्रदेश का नाम तक दे दिया गया हड़तालों और धरना प्रदर्शनों का दौर आज भी जारी है. आये दिन कोई-न कोई संगठन लगातार अपनी मांगों को लेकर धरना और प्रदर्शन करते ही रहते हैं. आपको मालूम है ही कि पिछले 17 सालों में राज्य मे ये सब लगातार चलता ही आ रहा है। आपको बता दे कि अब हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा है कि वह कर्मचारियों की हड़ताल को गैर कानूनी घोषित करे और हड़ताल कर रहे कर्मचारी संगठनों की मान्यता रद्द कर संगठनों पर जुर्माना लगाए.
राज्य के कुछ पत्रकार कहते है कि डबल इज़न की सरकार ने जल्द ही हड़तालों को खत्म करने और कर्मचारियों को नहीं समझाया तो राज्य और गर्त में चला जायेगा. प्रदेश में स्थिति इतनी गंभीर है इसका अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है की खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सार्वजनित तौर पर कर्मचारियों से कह चुके हैं की हड़ताल ना करें. ओर 15 अगस्त को उन्होंने मंच से भी एलान किया था कि वो राज्य को हड़ताली प्रदेश नही बनने देगे। राज्य के कर्मचारी लगातार जायज हो या नाजायज मांगों को लेकर आये दिन सड़क पर होते है उन पर सरकार की किसी भी बात का असर नही पड़ता ।वो कहते है कि जब राज्य की सरकारे हमारे साथ लगातार पिछले सालों से सौतेला व्यवहार कर रही है तो हम भी क्या करे।
आपको बता दे कि नैनीताल हाईकोर्ट ने भी सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं. की राज्य मे अब हड़ताल नही चलेगी बहराल अब देखना ये होगा कि कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार का अगला कदम क्या होता है
आपको बता दे कि हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश मनोज तिवारी की खंडपीठ ने कहा है कि हड़ताली कर्मचारी वेतन के हकदार नहीं हैं.हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा है कि वह कर्मचारियों की हड़ताल को गैरकानूनी घोषित करें साथ ही हड़ताल कर रहे कर्मचारी संगठनों की मान्यता को रद्द कर उन पर जुर्मान लगाए. हाई कोर्ट ने कर्मचारियों पर काम नहीं तो वेतन नहीं का नियम किये जाने की बात कही है. खंडपीठ ने सरकार से कहा है कि संगठनों की जायज मांगों को पूरा किया जाए.
कोर्ट के इस निर्देश पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है. वहीं विपक्षी पार्टियां इस फैसले का स्वागत तो कर ही रहीं हैं साथ ही वे इस मामले पर सरकार पर निशाना साधने से भी नहीं चूक रहें हैं. विपक्ष का कहना है कि आखिरकार क्यों सरकार इन कर्मचारियों पर अंकुश नहीं लगा पा रही है? उनका कहना है कि अगर हर बार कोर्ट को ही दखल कर प्रदेश के सभी मामलों को सुलझाना है तो सरकार किस काम की ?




