
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश पंचतत्व में विलीन हो गई है। उनके पार्थिव शरीर का रानी बाग स्थित चित्रशाला घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया । इंदिरा हृदयेश के छोटे बेटे एवं कांग्रेस नेता सुमित ह्रदयेश ने नेता प्रतिपक्ष की चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रीतम सिंह, अजय भट्ट सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधियों के अलावा बीजेपी और कांग्रेस के कई विधायक ने उन को अंतिम विदाई दी। रहा सभी की आंखें इस दौरान नम हो गई थी।
अंतिम संस्कार के दौरान चित्रशिला घाट पर हजारों की संख्या में भीड़ पहुंची हुई थी. सभी ने नम आंखों से उनको अंतिम विदाई दी. इस दौरान इंदिरा हृदयेश के परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे. इंदिरा हृदयेश की तीनों बहुएं भी चित्रशिला घाट पर पहुंचीं और उनको अंतिम विदाई दी. विधि-विधान और रीति-रिवाज के अनुसार पंडितों ने घाट पर मंत्रोच्चारण के साथ अंतिम विदाई दी. सभी की आंखें नम थी और सभी के चेहरे पर एक अलग तरह की बेचैनी सी थी की आखिर उनकी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा ह्रदयेश कहां चली गई, सभी ने इंदिरा ह्रदयेश के किए गए कार्यों को याद करते हुए उनके अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया।
प्रदेशभर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदिरा हृदयेश नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की. पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि स्व. इंदिरा हृदयेश कांग्रेस ही नहीं बल्कि प्रदेश व देशभर की नेता थीं. उनके अचानक निधन से कांग्रेस में जो क्षति पहुंची है उसकी कमी कभी पूरी नहीं की जा सकती है.
हीरा सिंह बिष्ट ने कहा कि इंदिरा हृदयेश के निधन से कांग्रेस को आगामी 2022 के चुनाव में भारी झटका लगा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा. क्योंकि उनकी प्रतिपूर्ति करना संभव नहीं है. इंदिरा हृदयेश का अनुभव उनकी उदारता और उनकी सोच कांग्रेस के धरोहर के रूप में विद्यमान थी.
इसकी प्रतिपूर्ति कैसे होगी इसको लेकर पार्टी आने वाले समय पर विचार करेगी. उन्होंने कहा कि उनके अनुभव का लाभ कांग्रेस को हमेशा मिलता रहा था और सभी उनकी योग्यता को जानते थे इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है.







