
दुःख दर्द का पहाड़ मेरा पहाड़
बता दे कि
सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में बीमार लोग डंडी कंडी के सहारे ना जाने कब तक रहेंगे !
उत्तराखंड के चमोली में इस वेदना का एक और मामला सामने आया है। जब बीमार महिला को डंडी कंडी में बैठा कर 10 किमी पैदल चलकर ग्रामीणों ने अस्पताल पहुंचाया ।
विकास खंड जोशीमठ के लांजी गांव की 65 साल की सावित्री की छाती में दर्द उभरा। वे दर्द से छटपटाने लगी। उन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता थी।
ग्राम प्रधान संदीप सिंह ने बताया सड़क और स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में आनन फानन में बीमार को डंडी कंडी में बैठा कर 10 किमी पथरीले पहाड़ी रास्तों के बीच से पैदल चल कर ग्रामीणों ने पीपलकोटी पहुंचाया और उसके बाद वाहन से देहरादून उपचार हेतु ले जाया गया। बताया सड़क के अभाव में बीमार होने पर चिकित्सालय तक न पहुंच पाने पर क्षेत्र के कई लोग आज तक दम तोड़ चुके हैं।
तीन महीने में आठवीं घटना
गांवों में सड़क रऔर स्वास्थ्य सुविधा न होने से डंडी कंडी से सड़क और अस्पतालों तक पहुंचाने की पिछले 3 महीनों में अकेले चमोली में ही यह 8 वीं घटना है। कलगोंठ में एक सप्ताह में ही 4 , किमाणा , गणाई, गैरसैण के सुदूर वर्ती गांवों से ऐसी वेदना भरी घटनाएं सामने आयीं हैं।
बहराल बोलता उत्तराखंड उम्मीद
करता है कि जल्द हमारे पहाड़ो के हालत स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधरेंगे
त्रिवेंद्र सरकार ने काफी हद तक इसमें सफलता भी पाई है
लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है







