
देहरादून- प्राइवेट स्कूलों को अपनी जागीर समझने वाले और सभी अभिभावकों को अपनी मनमानी की लाठी से हांकने पर उतारू निजी स्कूल प्रबंधक पर सरकार ने वाजिब लगाम लगाने की शुरुआत कर दी है।
पहले NCERT की किताबें लागू कर जहां अभिवाहकों को निजी स्कूलों के नाजायज चाबुक से बड़ी रहत दी हैं वही अब राज्य सरकार निजी स्कूलों की फीस को काबू में लाकर अभिभावकों को गदगद करने वाली है।
हालांकि, यह राहत चालू नए शैक्षिक सत्र 2018-19 में मिलने के आसार नहीं हैं। लेकिन राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने अगले शैक्षिक सत्र से इसे लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। शिक्षा मंत्री ने सरकार की मंशा साफ करते हुए कहा कि फीस रेग्युलेशन एक्ट का ड्राफ्ट एक महीने के भीतर तैयार होगा।
फीस एक्ट के जरिये राज्य सरकार प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, जूनियर, सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं के लिए अधिकतम शुल्क निर्धारित करेगी। इसके लिए जिला स्तर पर एक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक फी रेग्युलेटरी कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी निजी स्कूलों की फीस और उन पर निगरानी रखेगी।
गौरतलब है कि सचिवालय में बीते रोज (सोमवार) शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि एनसीईआरटी किताबों के संबंध में हाईकोर्ट का फैसला देशभर के लिए नजीर बनेगा। आदेश की कॉपी मिलने पर राज्य सरकार उसका अनुपालन करेगी।
वहीं शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि रेफरेंस बुक के संबंध में उन्होंने और शिक्षा सचिव ने निजी स्कूल संचालकों के साथ बैठक की थी। बैठक में स्कूलों को रेफरेंस बुक की सूची शिक्षा महकमे को देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन स्कूलों ने ये सूची अब तक नहीं सौंपी है।
बहरहाल सूबे की टीएसआर सरकार के इस कदम को उठाने के लिए राज्य के अभिभावक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि सरकार अब तक अपने कई फैसलों में कई बार रोलबैक कर चुकी है लेकिन फिर भी निजी स्कूलों में NCERT की किताब लागू करवाने के बाद अब जनता की सरकार से उम्मीदें और बढ़ गई है।
जनता को यकीन है कि अगले सत्र से निजी स्कूलों के फीस के चमड़ी उधेड़ चाबुक से उन्हें बडी़ राहत मिलेगी। हालांकि होगा क्या ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन सरकार की सस्ती किताबों की पहल से लग रहा है कि न केवल गुड़ जैसी बात हो रही हैं बल्कि टीएसआर राज में गुड़ भी मिल रहा है




