
राज्य के दबंग मंत्री अरविंद पांडेय अपने द्वारा लिए गए फैसलों से मीडिया से लेकर जनता की नज़र में छाए रहते है फिर चाहे कोई उनके द्वारा लिए गए फेसले की आलोचना करे या तारीफ मंन्त्री जी को इससे फर्क नही पड़ता उनका तो काम है कि बस जो कद दिया सो क्ह दिया ओर एक बार को फैसला ले लिया तो जनाब खुद की भी नही सुनते ।ये लाइन पांडये जी पर ही सटीक बैठती है ।

आपको बता दे कि अब
दो से अधिक बच्चे वालों को चुनाव लड़ने से रोकने पर न्याय विभाग की मुहर लग चुकी है
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराने के पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को लेकर फाइल अब आगे सरकने लगी है
साल 2019 में राज्य में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराने के पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को लेकर फाइल सरकने लगी है। इस कड़ी में न्याय विभाग ने परीक्षण के बाद इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय ने प्रमुख सचिव न्याय से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी।
आपको बता दे कि प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए 2016 में बने एक्ट की कुछ व्यवस्थाओं में सरकार संशोधन करने जा रही है। इसी कड़ी में निश्चय किया गया है कि जिस प्रकार नगर निकायों में व्यवस्था है कि दो से अधिक बच्चों वाले चुनाव नहीं लड़ पाएंगे, उसी तरह की व्यवस्था पंचायतों में भी लागू की जाए। पंचायती राज मंत्री अरविंद पांडेय के निर्देश के बाद इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर परीक्षण के लिए न्याय विभाग को भेजा गया था। इस पर न्याय विभाग ने हरी झंडी दे दी है।
जाहिर है कि इससे प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी बाधा दूर हो गई है। यही नहीं, पंचायत प्रतिनिधियों के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने के मद्देनजर अधिकारियों को हरियाणा और राजस्थान के पंचायती राज एक्ट का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन राज्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए सामान्य श्रेणी में दसवीं और आरक्षित श्रेणी में न्यूनतम शैक्षिणिक योग्यता आठवीं पास रखी गई है। इसका मसौदा भी तैयार किया जा रहा है। बहराल अब देखना ये होगा कि विपक्ष के बयान क्या निकलकर आते है ओर छोटी सरकार क्या कहती है ।






